NCR में पुराने ट्रक-बसों को बदलने की तैयारी, ‘परिवर्तन’ योजना में 25 हजार रजिस्ट्रेशन की उम्मीद

परिवर्तन योजना के तहत NCR में पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले ट्रक-बसों को बदलने का लक्ष्य है। सरकार को 25,000 रजिस्ट्रेशन की उम्मीद है, जबकि अब तक 1,450 वाहन मालिक पंजीकरण करा चुके हैं।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाणिज्यिक वाहनों को हटाकर उनकी जगह नए वाहन लाने के लिए केंद्र सरकार की ‘परिवर्तन’ योजना को गति देने की तैयारी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को उम्मीद है कि योजना के तहत करीब 25 हजार लाभार्थी पंजीकरण कराएंगे। योजना शुरू होने के बाद अब तक 1,450 पुराने ट्रक और बस मालिक इसमें पंजीकरण करा चुके हैं।

NCR में दो लाख से अधिक पुराने ट्रक-बस

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव वी. उमाशंकर ने शुक्रवार को योजना से जुड़ी जानकारी साझा की। मंत्रालय के मुताबिक NCR में दो लाख से अधिक ट्रक और बसें ऐसी हैं, जो BS-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों के तहत आती हैं। इन पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना योजना का प्रमुख उद्देश्य है।

सरकार का प्रयास है कि पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह नए एवं अपेक्षाकृत कम प्रदूषण वाले वाहनों को बढ़ावा दिया जाए। इससे NCR में वायु प्रदूषण कम करने के साथ-साथ वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में पुराने वाहनों के स्थान पर नए वाहनों को लाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

9,585 करोड़ रुपये का है योजना का बजट

‘परिवर्तन’ योजना को केंद्रीय कैबिनेट ने तीन जून को मंजूरी दी थी। योजना का कुल बजट 9,585 करोड़ रुपये रखा गया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 5,041 करोड़ रुपये की सहायता शामिल है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस योजना को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड के माध्यम से लागू कर रहा है।

योजना का लाभ उन पात्र वाहन मालिकों को मिलेगा, जो अपने पुराने वाणिज्यिक वाहनों को बदलकर निर्धारित मानकों के अनुरूप नए वाहन खरीदेंगे।

वाहन मालिकों को मिलेंगे कई वित्तीय लाभ

पुराने वाहनों को बदलने के लिए सरकार की ओर से वाहन मालिकों को कई तरह के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इनमें मोटर वाहन टैक्स में छूट और पंजीकरण शुल्क की माफी प्रमुख हैं।

इसके अलावा नए वाहन की खरीद के लिए लिए गए वाहन ऋण पर पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी भी दी जाएगी। मूल उपकरण निर्माता (OEM) की ओर से कम से कम आठ प्रतिशत की छूट का प्रावधान भी योजना में किया गया है।

पात्र डीजल और सीएनजी रिप्लेसमेंट वाहनों के लिए हर महीने फ्यूल वाउचर की सहायता भी मिलेगी। वहीं, इलेक्ट्रिक रिप्लेसमेंट वाहनों और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (COD) ट्रेडिंग के लिए एक बार की आर्थिक सहायता का भी प्रावधान किया गया है।

दिल्ली समेत चार राज्यों में टैक्स छूट

योजना को प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों ने पात्र नए वाहनों के लिए 10 वर्ष तक मोटर वाहन टैक्स में छूट देने की घोषणा की है। इसके साथ ही पंजीकरण शुल्क माफ करने का भी प्रावधान किया गया है।

इससे पुराने ट्रक और बस मालिकों के लिए नए वाणिज्यिक वाहन खरीदने की शुरुआती लागत कम होने की उम्मीद है। सरकार को उम्मीद है कि वित्तीय प्रोत्साहन के चलते अधिक से अधिक वाहन मालिक पुराने वाहनों को बदलने के लिए आगे आएंगे।

15 वाहन निर्माता कंपनियों से समझौता

वाणिज्यिक वाहन बाजार में 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले 15 मूल उपकरण निर्माताओं (OEM) ने भी योजना के तहत पुराने वाणिज्यिक वाहनों को बदलने पर निर्धारित छूट देने के लिए मंत्रालय के साथ समझौते किए हैं।

सरकार की कोशिश है कि योजना के जरिए पुराने वाहनों को हटाने की प्रक्रिया को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाया जाए। इससे एक तरफ वाहन मालिकों को नए वाहन खरीदने में आर्थिक मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर NCR में पुराने और प्रदूषणकारी वाणिज्यिक वाहनों की संख्या घटाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

प्रदूषण नियंत्रण पर सरकार का फोकस

NCR में वायु प्रदूषण की समस्या को देखते हुए पुराने वाणिज्यिक वाहनों को हटाना सरकार की प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का अहम हिस्सा है। ‘परिवर्तन’ योजना के जरिए पुराने ट्रकों और बसों को नए वाहनों से बदलने पर जोर दिया जा रहा है।

मंत्रालय को उम्मीद है कि आने वाले समय में पंजीकरण की संख्या तेजी से बढ़ेगी और 25 हजार वाहन मालिक योजना का लाभ उठाकर अपने पुराने वाणिज्यिक वाहनों को बदलेंगे।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button