एशियाड में पारुल चौधरी का पावर प्ले, दो एशियन गेम्स में दो-दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं

“Asian Games 2026: मेरठ की पारुल चौधरी ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में 3000 मीटर स्टीपलचेज और 5000 मीटर में कांस्य पदक जीता। 2023 में भी दो पदक जीत चुकी पारुल लगातार दो एशियन गेम्स में दो-दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं।“

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली भारतीय एथलीट पारुल चौधरी ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए लगातार दूसरे दिन पदक जीता। महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ के फाइनल में पारुल ने 15 मिनट 14.61 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया। इससे एक दिन पहले उन्होंने 3000 मीटर स्टीपलचेज में भी कांस्य पदक जीता था।

पारुल की लगातार दो स्पर्धाओं में पदक जीतने की इस उपलब्धि से उनके परिवार और मेरठ के इकलौता गांव में खुशी का माहौल है। किसान परिवार से आने वाली पारुल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मेहनत और प्रदर्शन से एक बार फिर भारत का नाम रोशन किया है।

3000 मीटर स्टीपलचेज के बाद 5000 मीटर में भी पदक

आइची-नागोया में पारुल चौधरी के लिए प्रतियोगिता की शुरुआत 1500 मीटर दौड़ से हुई थी। उन्होंने शनिवार को इस स्पर्धा में हिस्सा लिया और चौथे स्थान पर रहीं। इसके बाद रविवार को महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।

पारुल ने इसके अगले ही दिन 5000 मीटर दौड़ के फाइनल में उतरकर एक और पदक अपने नाम कर लिया। उन्होंने 15:14.61 मिनट के समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। इस तरह एशियन गेम्स के मौजूदा संस्करण में पारुल के नाम दो कांस्य पदक हो गए हैं।

2023 में भी जीते थे दो पदक

पारुल चौधरी का एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन नया नहीं है। 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी उन्होंने दो पदक जीते थे। उस प्रतियोगिता में पारुल ने 3000 मीटर स्टीपलचेज में रजत पदक और 5000 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल किया था।

अब आइची-नागोया एशियन गेम्स में उन्होंने इन्हीं दोनों स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में दो और पदक जोड़ लिए हैं। इस तरह उनके एशियन गेम्स करियर में कुल चार पदक हो गए हैं।

दो लगातार एशियन गेम्स में दो-दो पदक

पारुल की इस उपलब्धि को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि वह लगातार दो एशियन गेम्स में दो-दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनी हैं। 2023 में एक स्वर्ण और एक रजत जीतने के बाद अब 2026 में उन्होंने दो कांस्य पदक हासिल किए हैं।

यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। खासकर लंबी दूरी और स्टीपलचेज जैसी स्पर्धाओं में पारुल ने लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

परिवार में जश्न, गांव में खुशी का माहौल

पारुल के भाई राहुल चौधरी ने उनकी सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि 5000 मीटर में भी बहन ने देश के लिए पदक जीतकर पोडियम पर जगह बनाई है। परिवार अब पारुल के घर लौटने का इंतजार कर रहा है और उनके वापस आने पर भव्य स्वागत की तैयारी है।

पारुल के पिता कृष्णपाल चौधरी भी बेटी की कामयाबी से बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में जश्न का माहौल है। बारिश के बावजूद पारुल को बधाई देने के लिए लोग लगातार घर पहुंच रहे हैं।

किसान की बेटी से एशियन गेम्स की पदक विजेता तक

मेरठ के इकलौता गांव से निकलकर एशियन गेम्स के मंच तक पहुंची पारुल चौधरी की कहानी मेहनत और निरंतरता की मिसाल है। 2023 में दो पदक जीतने के बाद 2026 में भी दो पदक हासिल कर उन्होंने अपनी उपलब्धियों में चार एशियन गेम्स पदक जोड़ लिए हैं।

आइची-नागोया में 3000 मीटर स्टीपलचेज और 5000 मीटर में लगातार दो कांस्य पदक जीतकर पारुल ने भारतीय एथलेटिक्स में अपनी एक अलग पहचान कायम की है। उनके प्रदर्शन से मेरठ के इकलौता गांव से लेकर पूरे देश में खुशी का माहौल है।

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