“उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नाम जुड़वाना आसान हो गया है। फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। एसआइआर में छूटे पात्र नागरिक ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकेंगे।
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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया को अब आसान कर दिया गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर के दौरान मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित रह गए पात्र नागरिकों के लिए राहत की खबर है। अब फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इससे पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के साथ ही छूटे हुए, बेघर, दिव्यांग और महिला मतदाताओं को भी नाम जुड़वाने में सुविधा होगी।
फार्म-6 से जुड़ सकेगा मतदाता सूची में नाम
भारत निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फार्म-6 भर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध हैं।
पात्र नागरिक संबंधित बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के माध्यम से ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है।
अब घोषणा पत्र लगाना जरूरी नहीं
उप जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र लगाने की अतिरिक्त बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। यानी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए अब फार्म-6 के साथ अलग से घोषणा पत्र लगाना अनिवार्य नहीं होगा।
इस बदलाव से उन लोगों को विशेष रूप से राहत मिलने की उम्मीद है, जो पुराने पारिवारिक मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाने के कारण आवेदन प्रक्रिया में परेशानी का सामना कर रहे थे।
कौन कर सकता है मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन?
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदक का भारतीय नागरिक होना, संबंधित क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करना और निर्वाचन कानून के तहत मतदाता बनने के लिए अयोग्य नहीं होना आवश्यक है। पात्रता पूरी करने वाले नागरिक फार्म-6 के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं।
पहली बार 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा एसआइआर के दौरान किसी कारण से नाम छूट जाने वाले पात्र नागरिक भी आवेदन कर सकेंगे।
गोरखपुर में एसआइआर के दौरान 6.45 लाख से अधिक नाम हटे
गोरखपुर जिले में एसआइआर से पहले मतदाताओं की संख्या 36.66 लाख से अधिक थी। पुनरीक्षण अभियान के बाद जारी आंकड़ों में 6,45,634 नाम हटने और मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 30,20,908 होने की जानकारी दी गई थी।
बताया गया कि एसआइआर के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी थे, जो पहले मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित अपने, माता-पिता या दादा-दादी के नाम की आवश्यक जानकारी अथवा अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सके।
पुराने रिकॉर्ड की बाध्यता से परेशान लोगों को राहत
एसआइआर के दौरान फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र के जरिये पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी देना महत्वपूर्ण हो गया था। अब इस अतिरिक्त बाध्यता को समाप्त किए जाने से ऐसे पात्र नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके पास पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।
प्रशासन ने ऐसे पात्र नागरिकों से मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए फार्म-6 भरने की अपील की है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध होने के कारण पात्र नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।
मतदाता सूची में नाम की जांच करना भी जरूरी
मतदाता सूची में नाम छूटने की स्थिति में पात्र नागरिकों को समय रहते आवेदन करने के साथ अपने नाम की स्थिति की भी जांच करनी चाहिए। खासकर एसआइआर के बाद जिन लोगों का नाम सूची में नहीं है, वे फार्म-6 के माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
इस बदलाव का उद्देश्य मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया को सरल बनाना और पात्र नागरिकों को अतिरिक्त दस्तावेजी औपचारिकता से राहत देना है।
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