“फ्रांस में जारी छात्र विरोध-प्रदर्शनों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि यह देश पर कब्जे की कोशिश है।“
वॉशिंगटन। फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा और विवादित दावा किया है। ट्रंप ने फ्रांस में जारी आंदोलन के लिए बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा स्थिति केवल स्कूलों से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे देश पर इस्लामी प्रभाव बढ़ाने की कोशिश है।
ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में फ्रांस की स्थिति पर टिप्पणी की। उन्होंने वहां हो रहे प्रदर्शनों को अनियंत्रित बड़े पैमाने के प्रवासन से जोड़ते हुए इसे फ्रांस के लिए गंभीर चुनौती बताया।
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप के मुताबिक, फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, वह केवल शिक्षा या स्कूलों से संबंधित विवाद नहीं है। उन्होंने इसे बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जोड़ते हुए दावा किया कि इसका उद्देश्य फ्रांस पर कब्जा करना है।
ट्रंप लंबे समय से यूरोप में प्रवासन की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। उनके ताजा बयान ने फ्रांस में जारी छात्र प्रदर्शनों को लेकर अमेरिका की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।
फ्रांस में क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं छात्र?
रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर के अंतिम दिनों से फ्रांस के छात्र बेहतर परिस्थितियों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में कई हाई स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद किए गए।
कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की घटनाएं भी सामने आईं। मंगलवार को फ्रांस में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। उपलब्ध रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब ढाई लाख बताई गई है।
हालांकि, प्रदर्शन के स्थानीय कारणों और ट्रंप द्वारा लगाए गए प्रवासन तथा इस्लाम से जुड़े आरोपों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
यूरोप में प्रवासन को लेकर पहले भी मुखर रहे हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की यूरोप की प्रवासन नीति को लेकर पहले से ही कड़ी राय रही है। ट्रंप कई मौकों पर यूरोपीय देशों से अपनी सीमाओं को लेकर सख्त नीति अपनाने की अपील कर चुके हैं।
उनकी राजनीति में अवैध प्रवासन लंबे समय से प्रमुख मुद्दा रहा है। अमेरिका में भी ट्रंप समर्थक समूह प्रवासन को राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था से जोड़कर राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाते रहे हैं।
MAGA नेताओं ने फ्रांस के प्रदर्शनों को बनाया मुद्दा
फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शन का जिक्र अमेरिका के MAGA (Make America Great Again) समर्थक नेताओं और टिप्पणीकारों की ओर से भी किया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कई MAGA कमेंटेटरों ने फ्रांस की अशांति से जुड़े वीडियो और टिप्पणियां सोशल मीडिया पर साझा की हैं। ट्रंप के सहयोगी ग्लेन बेक ने भी फ्रांस की स्थिति को पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी के तौर पर पेश किया।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले प्रवासन पर जोर
फ्रांस के प्रदर्शनों का मुद्दा ऐसे समय उठा है जब अमेरिका में अगले महीने मध्यावधि चुनाव होने हैं। रिपब्लिकन खेमे में प्रवासन और अन्य सांस्कृतिक मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की बात कही जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की लोकप्रियता, ईरान के साथ संघर्ष के जोखिम और कांग्रेस में रिपब्लिकन नियंत्रण जैसे मुद्दों के बीच पार्टी का एक वर्ग प्रवासन से जुड़े मुद्दों पर और अधिक जोर दे रहा है।
ट्रंप के बयान से बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों को इस्लाम और बड़े पैमाने पर प्रवासन से जोड़ने वाला ट्रंप का बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रदर्शन के वास्तविक कारणों और अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
फिलहाल फ्रांस में आंदोलन जारी है और इस पर अमेरिकी राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप के बयान के बाद यूरोप में प्रवासन, एकीकरण और सामाजिक असंतोष को लेकर बहस फिर सुर्खियों में आ गई है।
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