“लखनऊ स्थित यूपी कांग्रेस मुख्यालय में जूता-चप्पल कांड की जांच के लिए राजेंद्र पाल गौतम ने पांच सदस्यीय समिति बनाई है। बृजलाल खाबरी की अध्यक्षता वाली समिति एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपेगी।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में रविवार को हुए हंगामे और जूता-चप्पल कांड की जांच के लिए पार्टी ने पांच सदस्यीय समिति गठित की है। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी को समिति का अध्यक्ष बनाया है। समिति को पूरे मामले की जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
समिति में उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी अभिषेक दत्त और अब्दुल हन्नान के अलावा पूर्व सांसद रवि वर्मा तथा महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शमीना शफीक को सदस्य बनाया गया है। प्रदेश प्रभारी के अनुसार, जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। समिति मंगलवार से मामले की जांच शुरू करेगी।
प्रदेश अध्यक्ष के पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान हुआ था विवाद
कांग्रेस मुख्यालय में यह घटना उस समय हुई, जब नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण का कार्यक्रम था। पार्टी की परंपरा के अनुसार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को पदभार ग्रहण कराने की जिम्मेदारी निभानी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, आराधना मिश्रा और अजय राय अलग-अलग समय पर प्रदेश मुख्यालय पहुंचे। मोना महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देने चली गईं, जबकि अजय राय अपने समर्थकों के साथ प्रदेश अध्यक्ष के कक्ष की ओर बढ़े। इसी दौरान महिला पार्षद ममता चौधरी और अजय राय के बीच कथित टिप्पणी को लेकर विवाद शुरू हो गया।
कहासुनी के बाद मारपीट तक पहुंचा मामला
बताया गया है कि ममता चौधरी की टिप्पणी पर अजय राय ने विरोध जताया, जिसके बाद उनके समर्थकों और पार्षद के बीच तीखी बहस हुई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर अजय राय के समर्थकों अमित और संदीप ने पार्षद पर जूते से हमला किया। इसके बाद मौके पर धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति बन गई।
घटना के बाद प्रदेश कांग्रेस संगठन की किरकिरी हुई और पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर सवाल उठने लगे। इसी पृष्ठभूमि में प्रदेश प्रभारी ने मामले की विस्तृत जांच के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया।
दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन
प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि घटना की जांच कराई जाएगी और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। समिति को एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देनी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विवाद में किसकी क्या भूमिका रही और पार्टी किस तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई करती है।
इस बीच, अजय राय ने बताया कि घटना के बाद वह अपने क्षेत्र वाराणसी चले गए हैं और पार्टी का काम कर रहे हैं। उन्होंने जांच समिति या घटना को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की।
अनुशासन समिति को लेकर भी उठे सवाल
प्रदेश कांग्रेस में अनुशासन संबंधी मामलों की जांच के लिए पूर्व विधायक श्याम किशोर शुक्ला के नेतृत्व में पहले एक समिति गठित की गई थी। हालांकि, समाचार रिपोर्ट के अनुसार, इस समिति में अध्यक्ष के अलावा अन्य सदस्य नहीं हैं।
जूता-चप्पल कांड की जांच के लिए गठित नई समिति में श्याम किशोर शुक्ला को शामिल नहीं किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के भीतर प्रदेश प्रभारी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के बीच पहले से मतभेद की चर्चा रही है। हालांकि, जांच समिति में बदलाव के पीछे की वजह को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इस घटना को लेकर यह दावा भी चर्चा में है कि कथित तौर पर जूता मारने वाला व्यक्ति कांग्रेस का कार्यकर्ता नहीं है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसे में जांच समिति की रिपोर्ट और पार्टी की आधिकारिक कार्रवाई पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
एक सप्ताह में सामने आएगी जांच रिपोर्ट
कांग्रेस की पांच सदस्यीय समिति मंगलवार से जांच शुरू करेगी। समिति घटना से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर पार्टी की ओर से आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
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