राजेश खन्ना की संपत्ति पर दावा करने वाली अनीता आडवाणी को SC से झटका, शादी जैसे रिश्ते की मांग खारिज

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेत्री अनीता आडवाणी की याचिका खारिज कर दी है। अनीता ने दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को कानूनी शादी का दर्जा देने की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। इस फैसले से राजेश खन्ना के परिवार को राहत मिली है।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की। इससे पहले मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट से भी अनीता आडवाणी को राहत नहीं मिली थी।

क्या थी अनीता आडवाणी की मांग?

अनीता आडवाणी का दावा था कि वह कई साल तक राजेश खन्ना के साथ रिश्ते में रही थीं और उनका संबंध शादी जैसा था। इसी आधार पर उन्होंने संपत्ति में हिस्सा देने और रहने के लिए घर उपलब्ध कराने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में उन्होंने राजेश खन्ना की पत्नी डिंपल कपाड़िया, अभिनेता अक्षय कुमार और उनकी बेटियों ट्विंकल खन्ना व रिंकी खन्ना को भी पक्ष बनाया था।

निचली अदालत से हाई कोर्ट तक खारिज हुई याचिका

मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट ने 2017 में अनीता आडवाणी का मुकदमा खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि राजेश खन्ना के निधन के समय डिंपल कपाड़िया के साथ उनका कानूनी विवाह कायम था। ऐसे में हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अनीता के रिश्ते को दूसरी कानूनी शादी का दर्जा देने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस फैसले के खिलाफ अनीता ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली।

2012 में राजेश खन्ना के निधन के बाद शुरू हुआ विवाद

हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना का जुलाई 2012 में निधन हो गया था। इसके बाद अनीता आडवाणी ने दावा किया कि वह लंबे समय तक अभिनेता के साथ मुंबई के बांद्रा स्थित उनके बंगले ‘आशीर्वाद’ में लिव-इन रिलेशनशिप में रही थीं।

अनीता का आरोप था कि राजेश खन्ना की मौत के बाद उन्हें बंगले से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने अभिनेता के परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया था।

घरेलू हिंसा मामले में भी नहीं मिली राहत

अनीता आडवाणी को घरेलू हिंसा से जुड़े मामले में भी राहत नहीं मिली थी। 2015 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले की कार्यवाही रद्द कर दी थी। अदालत ने कहा था कि अनीता और राजेश खन्ना का रिश्ता घरेलू हिंसा कानून, 2005 के तहत ‘शादी की प्रकृति’ वाले संबंध की श्रेणी में नहीं आता।

बाद में राजेश खन्ना के बंगले ‘आशीर्वाद’ को बेच दिया गया। हालांकि, अभिनेता के साथ अपने रिश्ते और संपत्ति के अधिकार को लेकर अनीता आडवाणी की कानूनी लड़ाई लंबे समय तक चली।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद इस मामले में अनीता को राहत पाने की एक और कोशिश में नाकामी मिली है।

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