“समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर 4 मिनट 39 सेकंड का वीडियो जारी किया है। वीडियो में “क्यों तेरी नगरी है उदास, क्या फिर से चले गए वनवास” गीत के जरिए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा गया है। पढ़िए पूरी खबर।“
लखनऊ/अयोध्या। राम मंदिर में चंदा और चढ़ावा में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक वीडियो जारी कर भाजपा सरकार और मंदिर प्रबंधन को निशाने पर लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए इस वीडियो में भावनात्मक गीत और प्रतीकात्मक दृश्यों के माध्यम से पूरे विवाद को उठाने का प्रयास किया गया है।
करीब चार मिनट 39 सेकेंड लंबे इस वीडियो का प्रमुख संदेश है— “क्यों तेरी नगरी है उदास, क्या फिर से चले गए वनवास”। वीडियो में भगवान राम के पुनः वनवास जाने की प्रतीकात्मक कल्पना को दिखाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि राम के नाम पर आस्था और विश्वास को ठेस पहुंची है।
अखिलेश यादव ने वीडियो के माध्यम से आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े आर्थिक मामलों को लेकर जनता के मन में सवाल पैदा हुए हैं और सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। वीडियो में मंदिर से जुड़े विवाद और कथित वित्तीय अनियमितताओं को प्रमुखता से स्थान दिया गया है।
राम मंदिर चंदा और चढ़ावा मामले ने जून के पहले सप्ताह में राजनीतिक रूप से तूल पकड़ा था। इसके बाद विपक्ष लगातार सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाबदेही तय करने की मांग करता रहा है। समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को जनता की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए व्यापक जांच और पारदर्शिता की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई और पुलिस ने इस प्रकरण में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा। जांच एजेंसियां अब भी वित्तीय लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल में जुटी हैं।
इस बीच मामले से जुड़े घटनाक्रम के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों द्वारा अपने पदों से इस्तीफा दिए जाने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष इसे अपनी आरोपों की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल और संबंधित पक्षों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी परिदृश्य को देखते हुए राम मंदिर से जुड़ा यह मुद्दा आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है। एक ओर विपक्ष इसे जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रश्न बना रहा है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक लाभ के लिए आस्था के मुद्दे के इस्तेमाल के रूप में पेश कर रही है।
राम मंदिर और उससे जुड़ी भावनाएं लंबे समय से देश की राजनीति और समाज दोनों के लिए महत्वपूर्ण रही हैं। ऐसे में इस प्रकरण पर जारी राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।
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