अमरनाथ यात्रा 2026 में पहली बार हाईटेक सुरक्षा कवच, QR कोड और फेस रिकग्निशन से होगी निगरानी

3 जुलाई से शुरू होगी 57 दिन की पवित्र यात्रा, मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था के बीच ड्रोन, स्मार्ट सीसीटीवी और डिजिटल पहचान प्रणाली पर रहेगा भरोसा

अमरनाथ यात्रा 2026 में पहली बार QR कोड आधारित पहचान पत्र, फेस रिकग्निशन तकनीक और स्मार्ट सीसीटीवी के जरिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। 3 जुलाई से शुरू होने वाली 57 दिवसीय यात्रा 28 अगस्त को संपन्न होगी।

श्रीनगर। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने अभूतपूर्व और हाईटेक इंतजाम किए हैं। 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलने वाली 57 दिनों की पवित्र यात्रा के दौरान पहली बार अत्याधुनिक तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत होगी कि “परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा।”

जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी यात्रा को “मैक्सिमम अलर्ट” मोड पर रखते हुए बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है। देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल इस यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, निगरानी और यातायात प्रबंधन की व्यापक योजना लागू की गई है।

पहली बार QR कोड आधारित डिजिटल पहचान व्यवस्था

यात्रियों और सेवा प्रदाताओं की निगरानी तथा सत्यापन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इस बार QR कोड आधारित डिजिटल पहचान पत्र प्रणाली शुरू की गई है। यात्रा से जुड़े पोर्टर, पिट्ठू, घोड़ा संचालक, दुकानदार और अन्य सेवा प्रदाताओं को डिजिटल आईडी जारी की जाएगी, जिससे उनकी पहचान और गतिविधियों की निगरानी आसानी से की जा सकेगी।

फेस रिकग्निशन तकनीक और स्मार्ट सीसीटीवी का इस्तेमाल

अमरनाथ यात्रा के इतिहास में पहली बार यात्रा मार्ग, बेस कैंप और संवेदनशील स्थानों पर फेस रिकग्निशन तकनीक से लैस कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम वाले हाई-रिजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरों के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन तकनीकों की मदद से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तत्काल संभव होगी और किसी भी खतरे से समय रहते निपटा जा सकेगा।

मल्टी-लेयर सुरक्षा घेरे में होगी यात्रा

यात्रा मार्गों, बेस कैंपों और ट्रांजिट पॉइंट्स पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसमें भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसडीआरएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान तैनात किए जाएंगे।

श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग और छोटे बालटाल मार्ग से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। दोनों मार्गों पर विशेष सुरक्षा चौकियां और निगरानी तंत्र स्थापित किए गए हैं।

लगातार हो रही मॉक ड्रिल और आपदा अभ्यास

यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगातार मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही हैं। बनिहाल रेलवे स्टेशन, भगवती नगर बेस कैंप और पुंछ समेत कई स्थानों पर संयुक्त अभ्यास किए गए हैं।

इन अभ्यासों में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल, एनएसजी कमांडो, सीआरपीएफ, एसडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने हिस्सा लिया और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारियों का परीक्षण किया।

ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष योजना

यात्रा के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। जम्मू से बालटाल और पहलगाम जाने वाले यात्रा काफिलों के लिए निर्धारित समय तय किए गए हैं, जबकि गैर-यात्री वाहनों के लिए कई स्थानों पर कट-ऑफ टाइम लागू रहेगा।

प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यात्रा काफिलों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय राजमार्ग पर भीड़ को नियंत्रित करना है।

28 अगस्त को होगा यात्रा का समापन

समुद्र तल से करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा की यात्रा इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू होकर रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को संपन्न होगी। इस बार यात्रा की अवधि पिछले वर्ष की तुलना में 38 दिन अधिक होगी, जिसके चलते सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान जारी दिशा-निर्देशों और ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें तथा सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग बनाए रखें।

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