“बेल्जियम से आया 308 पहियों वाला विशाल ट्रक बहराइच पहुंचा। यह लखीमपुर के कुंभी में बन रहे बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए भारी वेसल ले जा रहा है।“
बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में सोमवार को 308 पहियों वाला विशालकाय ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया। बेल्जियम से लाया गया यह विशेष ट्रेलर एक भारी-भरकम औद्योगिक वेसल लेकर लखीमपुर खीरी की ओर बढ़ रहा है। इस वेसल का इस्तेमाल वहां स्थापित किए जा रहे बायोप्लास्टिक प्लांट में किया जाना है। विशाल आकार और भारी वजन के कारण ट्रक की रफ्तार करीब पांच किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है।
ट्रक के जिले में पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी। नानपारा क्षेत्र के गुलालपुरवा टोल प्लाजा के आसपास भी लोगों ने इस विशाल ट्रेलर को गुजरते देखा। अपने आकार और पहियों की संख्या के कारण यह ट्रक स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
308 पहियों वाला ट्रक, अब 250 पहियों पर चल रहा
बेल्जियम से लाए गए इस ट्रेलर को 308 पहियों वाले ट्रक के नाम से जाना जा रहा है। खबर के मुताबिक, वर्तमान यात्रा के दौरान यह करीब 250 पहियों के सहारे आगे बढ़ रहा है। इस पर एक विशाल औद्योगिक वेसल रखा गया है, जिसे निर्धारित स्थान तक पहुंचाना है।
इतने बड़े और भारी उपकरण को सड़क मार्ग से ले जाना एक चुनौतीपूर्ण काम है। ट्रक की धीमी रफ्तार और उसके विशाल आकार को देखते हुए इसके सफर पर लोगों की नजर बनी हुई है। यह ट्रेलर चंदौली और वाराणसी के रास्ते बहराइच पहुंचा और यहां से लखीमपुर खीरी की ओर रवाना हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रक रविवार रात दुलारपुर टोल प्लाजा पहुंचा था। इसके बाद सोमवार शाम करीब छह बजे यह नानपारा के गुलालपुरवा टोल प्लाजा के पास पहुंचा। इसके आगे का सफर लखीमपुर स्थित औद्योगिक परियोजना तक जारी है।
लखीमपुर के कुंभी में स्थापित हो रहा बायोप्लास्टिक प्लांट
बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड की ओर से लखीमपुर खीरी के कुंभी यूनिट में गन्ने से पर्यावरण के अनुकूल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने के लिए प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना में पॉलीलैक्टिक एसिड यानी पीएलए और को-पॉलिमर के निर्माण के साथ अनुसंधान पर भी काम किया जाना है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्लांट की लागत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई है। इसकी प्रस्तावित उत्पादन क्षमता लगभग 100 टन प्रतिवर्ष है। परियोजना का उद्देश्य गन्ने से प्राप्त कच्चे माल का उपयोग करके ऐसे प्लास्टिक का उत्पादन करना है, जो पारंपरिक प्लास्टिक के मुकाबले पर्यावरण पर कम प्रभाव डाले।
इसी क्षेत्र में एक अन्य बड़ी परियोजना स्थापित करने की भी जानकारी सामने आई है। इसके लिए तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और लगभग 80 हजार टन सालाना उत्पादन क्षमता का उल्लेख किया गया है। हालांकि, दोनों परियोजनाओं की उत्पादन क्षमता, लागत और संचालन की स्थिति की अलग-अलग आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इनके वास्तविक पैमाने का पूरा आकलन किया जा सकेगा।
कैसे गन्ने से तैयार होगा बायोप्लास्टिक?
गन्ने से बायोप्लास्टिक बनाने की प्रक्रिया में पहले गन्ने से प्राप्त शर्करा का उपयोग किया जा सकता है। सूक्ष्मजीवों की मदद से शर्करा को लैक्टिक एसिड में बदला जाता है। इसके बाद रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से लैक्टिक एसिड से पॉलीलैक्टिक एसिड यानी पीएलए तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग बायोप्लास्टिक उत्पाद बनाने में किया जाता है।
इस तकनीक के जरिए गन्ने जैसे कृषि आधारित कच्चे माल से प्लास्टिक का विकल्प विकसित करने की संभावना बढ़ती है। इससे कृषि उत्पादों का औद्योगिक उपयोग बढ़ सकता है और पेट्रोलियम आधारित पारंपरिक प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, बायोप्लास्टिक के पर्यावरणीय लाभ उसके प्रकार और निपटान की परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। पीएलए से बने सभी उत्पाद सामान्य वातावरण में आसानी से खाद में नहीं बदलते। कई उत्पादों के प्रभावी जैविक विघटन के लिए विशेष औद्योगिक कंपोस्टिंग परिस्थितियों की जरूरत होती है।
सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प बनने की उम्मीद
परंपरागत प्लास्टिक के कचरे का लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहना एक बड़ी समस्या है। ऐसे में कृषि आधारित कच्चे माल से तैयार होने वाले बायोप्लास्टिक को कुछ उपयोगों में विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
यदि प्रस्तावित प्लांट में उत्पादन शुरू होता है और उत्पादों की गुणवत्ता तथा लागत व्यावसायिक स्तर पर अनुकूल रहती है, तो पैकेजिंग और अन्य उपयुक्त उपयोगों के लिए नए विकल्प विकसित हो सकते हैं। इससे गन्ना आधारित उद्योगों को चीनी उत्पादन से आगे बढ़कर नए उत्पादों के निर्माण का अवसर भी मिलेगा।
हालांकि, बायोप्लास्टिक को पारंपरिक प्लास्टिक का पूरी तरह पर्यावरण-मुक्त विकल्प मानना सही नहीं होगा। इसके वास्तविक लाभ उत्पादन प्रक्रिया, ऊर्जा की खपत, उपयोग और कचरे के उचित निस्तारण पर निर्भर करेंगे।
बहराइच में लोगों के लिए कौतूहल बना विशाल ट्रेलर
308 पहियों वाले इस ट्रक का आकार और धीमी रफ्तार लोगों के लिए खास आकर्षण बने हुए हैं। टोल प्लाजा और रास्ते के आसपास इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी। भारी वेसल को लेकर चल रहा यह ट्रेलर उत्तर प्रदेश में स्थापित हो रही औद्योगिक परियोजना से भी जुड़ा है।
फिलहाल, ट्रक का सफर बहराइच से लखीमपुर खीरी की ओर जारी है। इसके कुंभी यूनिट पहुंचने के बाद भारी वेसल को निर्धारित स्थान पर स्थापित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही गन्ने से बायोप्लास्टिक उत्पादन की इस परियोजना की अगली प्रगति पर नजर रहेगी।
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