बलिया गंगा घाट हादसा: नहाने गए 6 लोग डूबे, दो बहनों समेत 4 की मौत

मुंडन संस्कार में आए परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, दो लोगों को नाविकों ने बचाया

बलिया के श्रीरामपुर गंगा घाट पर मुंडन संस्कार में आए 6 लोग गंगा नदी में डूब गए। नाविकों ने 2 को बचाया, जबकि दो बहनों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। डीएम और एसपी मौके पर पहुंचे।

बलिया। बलिया के कोतवाली क्षेत्र स्थित श्रीरामपुर गंगा घाट पर रविवार को बड़ा हादसा हो गया। मुंडन संस्कार के लिए आए छह लोग गंगा नदी में स्नान के दौरान डूबने लगे। हादसे में दो सगी बहनों समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोगों को नाविकों ने बहादुरी दिखाते हुए सुरक्षित बचा लिया।

गहराई में जाने से हादसा

जानकारी के अनुसार, फेफना थाना क्षेत्र के कल्याणीपुर गांव निवासी वशिष्ठ चौहान अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ मुंडन संस्कार के लिए श्रीरामपुर घाट पहुंचे थे। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद परिवार के सदस्य गंगा स्नान कर रहे थे। इसी दौरान छह लोग नहाते-नहाते गहराई में चले गए और तेज धारा में बहने लगे।

नाविकों ने बचाई दो जानें

घाट पर मौजूद नाविकों ने तत्काल साहस दिखाते हुए एक युवक और एक युवती को नदी से बाहर निकाल लिया। लेकिन चार लोग गहरे पानी में समा गए। घटना के बाद घाट पर चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

चार शव बरामद

सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची। कई घंटों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद चारों शव बरामद कर लिए गए। मृतकों की पहचान हर्षिता चौहान (17), नंदिता चौहान (12), अरुण चौहान (20) और अर्जुन चौहान (21) के रूप में हुई है।

डीएम और एसपी मौके पर पहुंचे

घटना की सूचना पर जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य की निगरानी की तथा परिजनों से मुलाकात कर जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने, राहत कार्य तेज करने और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए।

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि पांच दिन पहले भी इसी घाट पर डूबने से चार लोगों की मौत हुई थी, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और गोताखोरों की स्थायी तैनाती न होने से हादसे लगातार हो रहे हैं।

घाट पर पसरा मातम

एक ही परिवार और रिश्तेदारी के चार युवाओं की मौत से गांव और घाट क्षेत्र में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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