वाराणसी में BRICS मेहमानों ने देखा भारत का आध्यात्मिक वैभव, सारनाथ से बाबा दरबार तक किया भ्रमण

ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन के बाद विदेशी मेहमानों ने सारनाथ, मूलगंध कुटी विहार, धमेक स्तूप और काशी के प्रमुख स्थलों का किया भ्रमण; भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से हुए अभिभूत

BRICS Representatives Sarnath Visit News: वाराणसी में BRICS संस्कृति सम्मेलन के बाद विदेशी प्रतिनिधियों ने सारनाथ, मूलगंध कुटी विहार, धमेक स्तूप और बाबा दरबार का भ्रमण किया। भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से प्रभावित मेहमानों ने अनुभव को अविस्मरणीय बताया।

वाराणसी। काशी में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन के समापन के बाद शनिवार को विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से जानने के लिए सारनाथ का भ्रमण किया। भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली पर पहुंचे विदेशी मेहमान यहां के शांत वातावरण, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक परंपराओं से गहराई से प्रभावित नजर आए।

बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली ने किया आकर्षित

प्रतिनिधियों ने सारनाथ स्थित प्रमुख बौद्ध स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मूलगंध कुटी विहार, धमेक स्तूप सहित कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का अवलोकन किया।

सारनाथ के आध्यात्मिक वातावरण और बौद्ध विरासत ने विदेशी प्रतिनिधियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। उन्होंने यहां भारतीय संस्कृति, धार्मिक सहिष्णुता और हजारों वर्षों पुरानी परंपराओं को नजदीक से समझने का अवसर प्राप्त किया।

भारतीय संस्कृति की गहराई से प्रभावित हुए मेहमान

ब्राजील से आए प्रतिनिधि लुकास ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत में धर्म, संस्कृति और परंपराएं लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने सारनाथ के अनुभव को प्रेरणादायक और अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।

प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज भी लोगों के जीवन और व्यवहार में जीवंत रूप से दिखाई देती है।

संस्कृति मंत्रालय ने बताया भ्रमण का उद्देश्य

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि इस भ्रमण का उद्देश्य विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की वास्तविक सांस्कृतिक धरोहरों और जीवंत परंपराओं से परिचित कराना है।

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक प्रासंगिकता को समझने और विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने में ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बाबा दरबार में भी लगाया माथा

सारनाथ भ्रमण के बाद प्रतिनिधियों ने वाराणसी के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का भी दौरा किया। सभी प्रतिनिधि बड़ा लालपुर स्थित ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर पहुंचे और इसके बाद बाबा दरबार में दर्शन-पूजन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

प्रतिनिधियों ने काशी की धार्मिक परंपराओं, श्रद्धा और सांस्कृतिक विविधता को करीब से देखा, जिससे उनका यह दौरा और अधिक यादगार बन गया।

हस्तकला संकुल में जाना भारतीय कला का वैभव

ब्रिक्स प्रतिनिधियों ने बाद में पंडित दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने भारतीय हस्तशिल्प, पारंपरिक कला और स्थानीय कारीगरों की उत्कृष्ट शिल्पकला को देखा।

प्रतिनिधियों ने भारतीय कारीगरों की प्रतिभा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों की सराहना की।

सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों के दौरे को देखते हुए सारनाथ और वाराणसी में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा एजेंसियां पूरे कार्यक्रम के दौरान सतर्क रहीं और सभी गतिविधियां पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुईं।

विदेशी मेहमानों के इस दौरे ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि वाराणसी और सारनाथ न केवल भारत की आध्यात्मिक राजधानी हैं, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक संवाद और सभ्यताओं के आदान-प्रदान के महत्वपूर्ण केंद्र भी बन चुके हैं।

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