“उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से बाल देखरेख संस्थाओं के 213 बच्चों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में सफलता हासिल की। 107 बच्चों ने 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर प्रथम श्रेणी हासिल की।“
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ की पहल और महिला कल्याण विभाग की योजनाओं का असर अब बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले निराश्रित बच्चों के भविष्य पर साफ दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के राजकीय बालगृहों और बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर नई मिसाल पेश की है।
महिला कल्याण विभाग के अनुसार, विभिन्न संस्थाओं और बालगृहों के कुल 213 बच्चों ने बोर्ड परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की हैं। इनमें से 107 बच्चों ने 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर प्रथम श्रेणी प्राप्त की है। कठिन परिस्थितियों में रहकर हासिल की गई यह सफलता पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।
आश्रय स्थल से ‘नई पाठशाला’ तक का सफर
प्रदेश सरकार का कहना है कि बाल देखरेख संस्थाओं को अब केवल आश्रय स्थल तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें बच्चों के सर्वांगीण विकास की नई पाठशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इन संस्थाओं में बच्चों की शिक्षा, मानसिक विकास और सामाजिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राजकीय सम्प्रेक्षण गृहों और बालगृहों में रहने वाले बच्चों को सकारात्मक और संस्कारयुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नियमित मनोवैज्ञानिक और व्यावसायिक काउंसिलिंग भी कराई जा रही है।
स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन कोचिंग से मिली नई दिशा
महिला कल्याण विभाग ने इन बच्चों को आधुनिक शिक्षा सुविधाओं से जोड़ने के लिए स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था की है। अनुभवी शिक्षकों द्वारा नियमित शैक्षिक मार्गदर्शन और एडवांस स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराया गया।
इसके साथ ही व्यक्तित्व विकास, मोटिवेशनल सत्र और करियर काउंसिलिंग जैसे कार्यक्रम भी लगातार आयोजित किए गए, जिससे बच्चों में सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास विकसित हुआ।
पारिवारिक अभाव के बावजूद हासिल की बड़ी सफलता
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने कहा कि इन बच्चों की उपलब्धि पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि कई बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने माता-पिता या पारिवारिक सहयोग के अभाव में बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर सफलता हासिल की।
उन्होंने कहा कि यह परिणाम साबित करता है कि यदि वंचित बच्चों को सही अवसर, बेहतर शैक्षिक माहौल और उचित मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
उच्च शिक्षा और रोजगारपरक पुनर्वास पर सरकार का फोकस
प्रदेश सरकार अब इन मेधावी बच्चों के उच्च शिक्षण, कौशल विकास और रोजगारपरक पुनर्वास की दिशा में भी काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी बच्चा अवसरों से वंचित न रहे और हर बच्चे को आत्मनिर्भर जीवन जीने का मौका मिले।
महिला कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बोर्ड परीक्षाओं के बाद इन बच्चों के लिए विशेष स्किल डेवलपमेंट और करियर आधारित योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं, ताकि वे आगे चलकर देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
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