“SIR विवाद के बीच कांग्रेस आज 25 सितंबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, हटाने और चुनावी फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।“
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी ने अपने राज्य संगठनों और जिला कांग्रेस समितियों को चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने को कहा है। कांग्रेस की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना, उनके खिलाफ कार्रवाई और Special Intensive Revision (SIR) के दौरान लिए गए फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा शामिल है।
कांग्रेस का यह प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है जब मतदाता सूची के SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पार्टी ने हालिया रिपोर्टों में सामने आई चुनाव आयुक्तों की आंतरिक आपत्तियों को भी मुद्दा बनाया है।
कांग्रेस ने क्यों बुलाया देशव्यापी प्रदर्शन?
कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठनों को 25 सितंबर को संबंधित राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा पार्टी ने जिला कांग्रेस कमेटियों को 28 सितंबर को अपने-अपने जिला कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन करने को कहा है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़े आरोप लगाए और कहा कि पार्टी तब तक आंदोलन जारी रखेगी जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं। ये आरोप कांग्रेस के राजनीतिक रुख के रूप में रिपोर्ट किए गए हैं; इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
SIR विवाद क्या है?
विरोध का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का Special Intensive Revision (SIR) है। हाल में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में कुछ फैसलों को उनकी जानकारी के बिना लिए जाने से संबंधित चिंताओं का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन टिप्पणियों को अपनी सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। आयोग के मुताबिक सदस्यों की अलग-अलग राय, सुझाव और आंतरिक जांच-परख संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।
कांग्रेस की क्या-क्या मांगें हैं?
कांग्रेस ने SIR से संबंधित निर्णयों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलावों की प्रक्रिया की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए।
इसके अलावा कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विपक्षी दलों के बीच ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में हटाने की प्रक्रिया शुरू करने को लेकर भी बातचीत की खबरें सामने आई हैं।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का मुद्दा
SIR विवाद में चुनाव आयोग के दो सदस्यों की कथित लिखित आपत्तियां खास मुद्दा बन गई हैं। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक संधू और जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ SIR-संबंधी निर्णयों पर आपत्ति दर्ज की थी। चुनाव आयोग ने बाद में कहा कि ऐसी टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव संस्थागत checks and balances का हिस्सा हैं।
इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं। कांग्रेस इन आपत्तियों को गंभीर सवालों के रूप में पेश कर रही है, जबकि चुनाव आयोग ने निर्णय प्रक्रिया में अलग-अलग विचारों को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया बताया है।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट में भी सवाल
SIR को लेकर न्यायिक स्तर पर भी सुनवाई चल रही है। 22 सितंबर 2026 को दिल्ली SIR से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और मतदाताओं को जवाब देने के लिए WhatsApp तथा ईमेल जैसे माध्यमों की सुविधा पर विचार करने का सुझाव दिया।
पश्चिम बंगाल में भी SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं को लेकर अपील का मामला सामने आया है। चुनाव आयोग के अनुसार 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने पुनः शामिल किए जाने के लिए अपील की थी।
कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा
ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मांगें अब सड़क से संसद तक पहुंचती दिख रही हैं। कांग्रेस ने 25 सितंबर के प्रदर्शन के साथ-साथ ज्ञानेश कुमार को हटाने की संसदीय प्रक्रिया के लिए विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश भी की है।
इस बीच, पूरे विवाद में SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव, चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियां और आयोग की निर्णय प्रक्रिया प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
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