सीजेआई की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी के गलत इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और CBI से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी के कथित गलत और व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और CBI से जवाब मांगा है। याचिका में कोर्ट की कार्यवाही के एडिटेड वीडियो के जरिए न्यायपालिका की छवि प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी के कथित गलत इस्तेमाल और उसके व्यावसायिक लाभ के लिए किए गए दुरुपयोग से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत की वर्चुअल कार्यवाही के एक हिस्से को चुनिंदा तरीके से एडिट कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया और सीजेआई की टिप्पणी का ऐसा अर्थ निकाला गया, जो उसके मूल संदर्भ से अलग था।

यह मामला उस टिप्पणी से जुड़ा है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम सामने आया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि अदालत में कही गई बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और इससे न केवल न्यायिक संस्था की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि कुछ लोगों या संगठनों ने इसका व्यावसायिक फायदा भी उठाया।

सुप्रीम कोर्ट में करीब आधे घंटे हुई बहस

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। मंगलवार को मामले पर करीब आधे घंटे तक सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता और उनके अधिवक्ता राजा चौधरी ने अदालत के सामने कहा कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की आवश्यकता है। उनका कहना था कि 15 मई को न्यायिक कार्यवाही के दौरान बिल्कुल अलग संदर्भ में इस्तेमाल किए गए ‘कॉकरोच’ शब्द को चुनकर उसे कथित तौर पर एडिट किया गया और फिर सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से इस तरह प्रचारित किया गया, जिससे न्यायपालिका की गरिमा और संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो।

याचिकाकर्ता ने क्या कार्रवाई मांगी?

PIL में मांग की गई है कि उन लोगों और संस्थाओं की जांच की जाए, जिन्होंने कथित तौर पर अदालत की कार्यवाही में कही गई बातों या उदाहरणों का व्यावसायिक लाभ उठाया।

याचिकाकर्ता ने ट्रेडमार्क के कथित दुरुपयोग, पैसे कमाने के उद्देश्य से सामग्री के प्रसार और बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल जैसे पहलुओं की जांच करने की मांग भी की है।

हालांकि, याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया कि संवैधानिक दायरे में निष्पक्ष आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। कार्रवाई उन मामलों में होनी चाहिए जहां कथित तौर पर सामग्री को तोड़-मरोड़कर पेश कर संस्था की गरिमा और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया जा रहा हो।

सीजेआई ने किस संदर्भ में की थी ‘कॉकरोच’ टिप्पणी?

याचिकाकर्ता ने संजय दुबे बनाम दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मामले में 15 मई को हुई सुनवाई का हवाला दिया। उनका कहना है कि सीजेआई ने ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी फर्जी वकीलों और न्यायिक प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग के संदर्भ में की थी।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, उस दौरान अदालत पेशेवर मानकों में गिरावट, न्यायिक प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल और इससे न्यायपालिका की संस्थागत विश्वसनीयता पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जता रही थी। आरोप है कि बाद में इसी टिप्पणी के एक हिस्से को अलग करके सोशल मीडिया पर ऐसे प्रसारित किया गया, जिससे उसका मूल संदर्भ बदल गया।

एडिटेड वीडियो और मीम्स पर भी उठाए सवाल

याचिकाकर्ता ने अदालत में दावा किया कि 15 मई के बाद चुनिंदा तरीके से एडिट किए गए अदालती कार्यवाही के वीडियो क्लिप्स के प्रसार में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि अदालत में कही गई टिप्पणियों को संदर्भ से अलग कर मीम्स और छोटे वीडियो के रूप में सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि ऐसी सामग्री का इस्तेमाल कई बार मुनाफा कमाने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही जजों और न्यायिक संस्थाओं की छवि को नकारात्मक तरीके से पेश किए जाने से जनता के भरोसे पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई है।

‘इन कोशिशों को रोकने के लिए कोई प्रभावी सिस्टम नहीं’

याचिकाकर्ता का कहना है कि अदालत की कार्यवाही और न्यायाधीशों की टिप्पणियों को संदर्भ से काटकर पेश करने के मामलों को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान और न्यायाधीशों को गलत तरीके से पेश कर जनता का भरोसा कमजोर करने की कोशिशों पर प्रभावी निगरानी नहीं है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और CBI से जवाब मांगा है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अदालत इस तरह की सामग्री के कथित दुरुपयोग और व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर क्या रुख अपनाती है।

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