“दिल्ली में प्याज की कीमत 60-65 रुपये किलो पहुंच गई है। महाराष्ट्र की बारिश से सप्लाई प्रभावित होने के बीच केंद्र और दिल्ली सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए हैं।“
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्याज की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। करीब एक महीने पहले जहां प्याज 35 से 40 रुपये किलो बिक रहा था, वहीं अब खुदरा बाजार में इसकी कीमत 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। रोजमर्रा के खाने में इस्तेमाल होने वाले प्याज के अचानक महंगे होने से आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है।
ओखला के तेखंड सब्जी बाजार में प्याज की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हालांकि दूसरी हरी सब्जियों के दाम फिलहाल तुलनात्मक रूप से कम हैं, लेकिन प्याज की कीमतों ने ग्राहकों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
सप्लाई घटने से बढ़े दाम
सब्जी कारोबारियों के मुताबिक बाजार में प्याज की आवक कम हुई है। महाराष्ट्र में लगातार हो रही बारिश ने प्याज के परिवहन को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर दिल्ली की मंडियों तक पहुंचने वाली आपूर्ति पर पड़ा है।
एक विक्रेता के अनुसार, कुछ समय पहले 35-40 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब करीब 60 रुपये किलो बिक रहा है। उनका कहना है कि अगर बाजार में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
ग्राहकों ने खरीदारी घटाई
बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी पर भी दिखाई दे रहा है। जो ग्राहक पहले एक किलो प्याज खरीदते थे, उनमें से कई अब आधा किलो से ही काम चला रहे हैं।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि इससे उनके कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। ग्राहक प्याज की जरूरत तो पूरी कर रहे हैं, लेकिन महंगाई के कारण मात्रा कम कर दी है।
एक ग्राहक ने बताया कि कुछ दिन पहले तक प्याज करीब 40 रुपये किलो मिल रहा था, लेकिन अब इसके लिए 60 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। बाजार में दुकानदार आगे भी कीमत बढ़ने की आशंका जता रहे हैं।
प्याज के साथ चीनी की कीमत भी बढ़ी
महंगाई का दबाव सिर्फ प्याज तक सीमित नहीं है। उपभोक्ताओं के मुताबिक चीनी की कीमत भी करीब 40 रुपये से बढ़कर 65-70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही। ऐसे में घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
दिल्ली सरकार ने बनाई कीमतों पर नजर रखने की योजना
प्याज और चीनी की उपलब्धता तथा कीमतों को लेकर दिल्ली सरकार ने निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को प्याज की कीमतों में और वृद्धि होने की स्थिति में अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगाकर प्याज उपलब्ध कराने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार जरूरत पड़ने पर NAFED से प्याज खरीदकर खरीद मूल्य पर बिक्री करने की योजना पर भी काम कर रही है। परिवहन और इससे जुड़े खर्च सरकार की ओर से वहन किए जाने की बात कही गई है।
इसके साथ ही दिल्ली पहुंचने वाली प्याज की आपूर्ति, बाजारों में स्टॉक और जमाखोरी पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि फिलहाल राजधानी में प्याज या चीनी की कोई कमी नहीं है।
महाराष्ट्र की बारिश ने बिगाड़ा प्याज का गणित
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे मौजूदा सीजन का समाप्त होना, पिछले वर्ष की तुलना में कम आवक और मौसम से जुड़ी परेशानियां प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। किसानों को भी मौसम में बदलाव के कारण नुकसान उठाना पड़ा है।
महाराष्ट्र में बारिश के कारण प्याज को दिल्ली तक पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। कारोबारियों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में महाराष्ट्र से आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो दिल्ली के खुदरा बाजार में प्याज के दाम और बढ़ सकते हैं।
केंद्र ने ‘कांदा एक्सप्रेस’ से भेजा प्याज
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में रखे प्याज के बफर स्टॉक को दिल्ली पहुंचाना शुरू किया है। इसके लिए विशेष रेलवे रेक के जरिए प्याज भेजा जा रहा है, जिसे ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल के तहत संचालित किया जा रहा है।
पहली खेप में करीब 800 टन प्याज बुधवार को दिल्ली पहुंचने की योजना है। इसे NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने की तैयारी है।
थोक बाजार में भी तेजी
बारिश और परिवहन की समस्या का असर थोक बाजार पर भी पड़ा है। कारोबारियों के अनुसार दिल्ली में प्याज की थोक कीमत पहले करीब 25 रुपये किलो थी, जो अब बढ़कर लगभग 50 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
महाराष्ट्र से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण राजस्थान के अलवर और दक्षिण भारत के राज्यों से आने वाली वैकल्पिक सप्लाई भी पर्याप्त नहीं हो पा रही है। ऐसे में दिल्ली के बाजारों में प्याज की उपलब्धता और कीमत दोनों पर दबाव बना हुआ है।
सरकार के पास कितना प्याज का बफर स्टॉक?
केंद्र सरकार कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति से निपटने के लिए प्याज का बफर स्टॉक रखती है। वर्ष 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक बनाए रखा गया है।
सरकार के अनुसार घरेलू मांग पूरी करने के लिए प्याज की उपलब्धता फिलहाल संतोषजनक है। वर्ष 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन करीब 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन उत्पादन के लगभग बराबर है।
ऐसे में आने वाले दिनों में दिल्ली में प्याज की कीमतों की दिशा काफी हद तक महाराष्ट्र से होने वाली आपूर्ति, बारिश की स्थिति और केंद्र के बफर स्टॉक की बाजार में उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
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