यूपी में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, दिल्ली से वाराणसी तक 865 किमी कॉरिडोर; भूमि अधिग्रहण की तैयारी शुरू

भूमि अधिग्रहण की तैयारी शुरू, लखनऊ और प्रयागराज में स्टेशन के लिए कई स्थानों पर विचार

दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश के मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी में भूमि अधिग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है। 865 किमी लंबे कॉरिडोर से दिल्ली से वाराणसी की यात्रा लगभग 6 घंटे में पूरी होगी।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में हाईस्पीड रेल नेटवर्क का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। परियोजना के तहत प्रदेश के कई जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश के मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी जिलों के विभिन्न गांवों में भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

865 किलोमीटर लंबा होगा हाईस्पीड कॉरिडोर

प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर लगभग 865 किलोमीटर लंबा होगा। यह हाईस्पीड रेल मार्ग दिल्ली से शुरू होकर नोएडा (जेवर), आगरा, लखनऊ और प्रयागराज होते हुए वाराणसी तक पहुंचेगा।

परियोजना का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पूर्वांचल के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय को उल्लेखनीय रूप से कम करना है। इससे व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

प्रयागराज में होगी अहम बैठक

परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रयागराज में प्रशासनिक अधिकारियों और परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में भूमि अधिग्रहण, संभावित स्टेशन स्थानों और अन्य तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार प्रयागराज और प्रतापगढ़ के जिला प्रशासन के अधिकारी भी बैठक में भाग लेंगे, जहां आगामी कार्ययोजना को अंतिम रूप देने पर विचार किया जाएगा।

लखनऊ और प्रयागराज में स्टेशन के लिए कई विकल्प

राजधानी लखनऊ में बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए किसान पथ एक्सप्रेसवे, वृंदावन योजना, इकाना स्टेडियम क्षेत्र और गोमती रिवरफ्रंट के आसपास संभावित स्थानों पर विचार किया जा रहा है।

वहीं प्रयागराज में सोरांव तहसील क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के निकट स्टेशन विकसित करने की संभावना पर चर्चा चल रही है। अंतिम निर्णय तकनीकी सर्वेक्षण और व्यवहार्यता रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

यात्रा समय में आएगी बड़ी कमी

बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी होने के बाद यात्रियों को यात्रा समय में बड़ा लाभ मिलेगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार दिल्ली से वाराणसी का सफर लगभग छह घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

इसके अलावा प्रयागराज से वाराणसी की दूरी लगभग 30 मिनट में और प्रयागराज से लखनऊ की दूरी करीब 55 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है।

किसानों को मिलेगा मुआवजा

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया National High Speed Rail Corporation Limited के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाएगी। प्रभावित किसानों और भूमि स्वामियों को निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि परियोजना अभी प्रारंभिक चरण में है और विभिन्न स्तरों पर तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं जारी हैं।

विकास और अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है। हाईस्पीड कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

यदि परियोजना निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े हाईस्पीड रेल नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।

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