“हरदोई के BSA डॉ. अजीत सिंह ने DM अनुनय झा और ADM प्रफुल्ल त्रिपाठी पर चार महीने से मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। 5 लाख रुपये रिश्वत मांगने के मामले में दर्ज FIR के बीच BSA ने निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।“
हरदोई। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों में घिरे हरदोई के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीएसए ने दावा किया कि उन्हें पिछले चार महीनों से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से माहौल बनाया जा रहा है।
डॉ. अजीत सिंह ने कहा कि जिला अधिकारी अनुनय झा और अपर जिला अधिकारी प्रफुल्ल त्रिपाठी द्वारा उन्हें लगातार दबाव में रखा जा रहा है। उनके खिलाफ झूठे भ्रष्टाचार के आरोप लगवाए जा रहे हैं और यहां तक कि उनके माता-पिता को भी विवाद में घसीटा गया है।
“जिला छोड़ने का बनाया जा रहा दबाव”
बीएसए ने कहा कि उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई किसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें हरदोई छोड़ने के लिए मजबूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “यदि मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई ठोस प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। केवल आरोप लगाकर किसी अधिकारी की छवि धूमिल करना उचित नहीं है।”
DM-ADM की भूमिका की भी जांच हो
डॉ. अजीत सिंह ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिए गए थे। ऐसे में केवल बेसिक शिक्षा विभाग को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि जांच के दायरे में उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया जाना चाहिए, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया और उससे जुड़े प्रशासनिक निर्णयों में भूमिका निभाई थी। निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है।
पांच लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप
विवाद की शुरुआत गोंडा जनपद की उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया के दौरान बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने उनसे पांच लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत के अनुसार संस्था को प्रदेश के विभिन्न जिलों में 210 पदों पर भर्ती प्रक्रिया संचालित करने का अधिकार मिला था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए संपर्क करने पर कथित रूप से रिश्वत मांगी गई। आरोप है कि संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जमानत राशि जब्त कराने की धमकी भी दी गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि दबाव में आकर उन्होंने दो लाख रुपये दिए, लेकिन इसके बाद भी शेष धनराशि की मांग जारी रही।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़े सवाल
बीएसए के ताजा आरोपों के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। एक ओर उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने सीधे जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों पर उत्पीड़न और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के आरोप जड़ दिए हैं।
हालांकि बीएसए के आरोपों पर जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
29 हजार शिक्षक भर्ती के रिकॉर्ड पर भी सवाल
इसी बीच बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है। बताया गया कि भर्ती से संबंधित 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां रिकॉर्ड से गायब मिली हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की तीन सदस्यीय जांच समिति बीएसए कार्यालय पहुंची।
कई दस्तावेज गायब, कमरे और अलमारियां सील
जांच टीम ने भर्ती, नियुक्ति और सेवा अभिलेखों सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान कुछ जरूरी पत्रावलियां रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं मिलीं।
स्थिति को गंभीर मानते हुए अधिकारियों ने भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जांच पर टिकीं निगाहें
बीएसए और जिला प्रशासन के बीच आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह मामला अब केवल भर्ती प्रक्रिया या भ्रष्टाचार के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और उसके निष्कर्षों पर अब शिक्षा विभाग के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों की भी नजरें टिकी हुई हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों के पीछे कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
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