हुमायूं कबीर बाबर मुर्दाबाद बयान से हलचल—‘बाबर अत्याचारी था, नारा लगाने में दिक्कत नहीं’

हुमायूं कबीर बाबर मुर्दाबाद बयान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। टीएमसी से निलंबित विधायक ने TV चैनल पर खुलेआम कहा कि बाबर आक्रांता था और उन्हें ‘बाबर मुर्दाबाद’ बोलने में कोई दिक्कत नहीं। उनका दावा है कि उनका विवाद सिर्फ मस्जिद के नाम और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।

  • टीएमसी से निलंबित विधायक ने कहा, बाबर मुर्दाबाद बोलने में भी मुझे कोई दिक्कत नहीं
  • उन्होंने एक टीवी चैनल पर भी बाआवाज बुलंद बाबर मुर्दाबाद कहकर तहलका मचा दिया
  • हुमायूं का यह बयान बाबर को महिमा मंडित कर रहे कट्टरपंथियों को एक बड़ा सबक

अभयानंद शुक्ल
समन्वय सम्पादक

हुमायूं कबीर बाबर मुर्दाबाद बयान : ‘बाबर अत्याचारी था, उसे मुर्दाबाद बोलने में कोई दिक्कत नहीं’

टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपने बयान से राजनीति में भूचाल ला दिया है।
लाइव टीवी शो पर दिए गए हुमायूं कबीर बाबर मुर्दाबाद बयान ने कट्टरपंथी मुस्लिम समूहों में खलबली मचा दी है।

उन्होंने जोरदार आवाज में कहा—

“बाबर आक्रांता था, उसने अत्याचार किया। मुझे बाबर मुर्दाबाद बोलने में भी कोई दिक्कत नहीं। मेरा जुड़ाव सिर्फ मस्जिद से है, बाबर से नहीं।”

हुमायूं कबीर ने TV चैनल के मंच से खुद नारा लगाते हुए कहा—
“बाबर मुर्दाबाद…!”

उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक भाजपा में बिताए उनके पुराने समय का असर बता रहे हैं।
लेकिन यह टिप्पणी उन कट्टर मुस्लिम समूहों के लिए बड़ा झटका है, जो बाबर को महिमामंडित करने की कोशिश में लगे हैं।

मस्जिद से जुड़ाव, बाबर से नहीं—हुमायूं कबीर का स्पष्टीकरण

कबीर का कहना है कि—

  • “बाबर ने अत्याचार किया—यह मैं मानता हूं।”
  • “मेरा मकसद सिर्फ मस्जिद की पुनर्स्थापना से है।”
  • “बाबर गलत था, इसे स्वीकारने में मुझे दिक्कत नहीं।”
  • “कोई यह तय नहीं कर सकता कि मैं मस्जिद का नाम क्या रखूं।”

उन्होंने कहा कि चूँकि “अल्लाह का घर” कही जाने वाली बाबरी मस्जिद तोड़ी गई थी, इसलिए वे उसकी “भरपाई” के रूप में बेलडांगा (मुर्शिदाबाद) में नई बाबरी मस्जिद बना रहे हैं।

गीता पाठ और राम मंदिर पर भी नहीं एतराज

हुमायूं कबीर ने अपने बयान में हिंदू परंपराओं पर भी सकारात्मक टिप्पणी करते हुए कहा—

  • “कहीं मंदिर बने—मुझे कोई एतराज नहीं।”
  • “सामूहिक गीता पाठ हो—मुझे कोई दिक्कत नहीं।”
  • “जैसे गीता पाठ होता है, वैसे मैं 1 लाख लोगों के साथ कुरान पाठ कराऊंगा।”

यह रुख उन्हें कट्टर जमातों की राजनीति से अलग खड़ा करता है।

10 दिसंबर का संकेत सही साबित

“राष्ट्रीय प्रस्तावना” ने पहले ही 10 दिसंबर के अंक में संकेत दिया था कि हुमायूं कबीर का वैचारिक संघर्ष जारी है और उनमें “भाजपाई संस्कार” अब भी सक्रिय हैं।
10 दिसंबर के उनके ताज़ा बयान ने इसे प्रमाणित कर दिया।

साफ है—
हुमायूं कबीर मस्जिद के समर्थक तो हैं, लेकिन बाबर को आदर्श मानने वालों से दूरी बनाने का स्पष्ट संदेश दे रहे हैं।

कट्टरपंथियों के लिए बड़ा झटका

मस्जिद निर्माण के मुद्दे पर पूरे देश में जोश भरने वाले हुमायूं कबीर का यह बयान अब उसी जोश पर पानी फेरता दिख रहा है।
कट्टर मुस्लिम समूह इस नए रुख से नाराज़ हैं।
लेकिन इतना तय है कि—
हुमायूं ने बाबर को ऊंचा दिखाने वाली जमात को सीधा और कड़ा जवाब दे दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button