“IMA Passing Out Parade 2026 में भारतीय सैन्य अकादमी के 94 साल के इतिहास में पहली बार 9 महिला कैडेट्स भारतीय सेना में अधिकारी बनीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे ऐतिहासिक और महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण क्षण बताया।“
देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के 94 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में शनिवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। पहली बार महिला अधिकारी कैडेट्स का एक बैच प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की राष्ट्रपति एवं सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने इसे भारतीय रक्षा बलों के इतिहास का “वाटरशेड मोमेंट” बताते हुए महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में बड़ा कदम करार दिया।

देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में आयोजित 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की भव्य पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि नौ महिला कैडेट्स को परेड में शामिल होते देख उन्हें विशेष प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल आईएमए के इतिहास में मील का पत्थर नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
राष्ट्रपति ने कहा, “मैं नौ महिला कैडेट्स को देखकर विशेष रूप से प्रसन्न हूं। यह आईएमए के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण है। यह न केवल भारत की रक्षा सेवाओं के इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का प्रेरणादायक उदाहरण भी है। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में और अधिक महिलाएं इस प्रतिष्ठित अकादमी का हिस्सा बनेंगी।”
515 कैडेट्स बने भारतीय सेना का हिस्सा
इस वर्ष आयोजित पासिंग आउट परेड में कुल 515 जेंटलमैन और लेडी कैडेट्स ने सफलतापूर्वक सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें नौ महिला अधिकारी कैडेट्स भी शामिल रहीं, जिन्होंने जुलाई 2025 में आईएमए में प्रवेश लिया था। कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और सैन्य दक्षता की सभी कसौटियों पर खरा उतरने के बाद अब वे भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देंगी।
परेड के दौरान महिला कैडेट्स ने अपने पुरुष साथियों के साथ कदम से कदम मिलाकर मार्च किया। यह दृश्य न केवल आईएमए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक बना।

सेना में बढ़ रही महिलाओं की भूमिका
महिला कैडेट्स का यह पहला बैच भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों ने महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। स्थायी कमीशन, कमांड जिम्मेदारियां और विभिन्न सैन्य शाखाओं में बढ़ती भागीदारी ने महिलाओं को सेना में नई पहचान दिलाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईएमए से महिला अधिकारी कैडेट्स का पास आउट होना भारतीय सेना में लैंगिक समानता और समावेशी नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
16 मित्र देशों के 34 कैडेट्स भी हुए पास आउट
इस वर्ष की पासिंग आउट परेड में 16 मित्र देशों के 34 विदेशी अधिकारी कैडेट्स ने भी प्रशिक्षण पूरा किया। ये कैडेट अपने-अपने देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में सेवाएं देंगे। इससे भारत और विभिन्न देशों के बीच रक्षा सहयोग और सैन्य संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रसेवा, साहस और सम्मान का प्रतीक है IMA
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में भारतीय सैन्य अकादमी को राष्ट्रसेवा, साहस और सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने देश को अनेक वीर सैन्य अधिकारी और महान सैन्य नेता दिए हैं, जिन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।
उन्होंने अकादमी के अधिकारियों, प्रशिक्षकों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि उनके योगदान से ही देश को सक्षम और समर्पित सैन्य नेतृत्व प्राप्त होता है।
1932 से तैयार कर रहा है सैन्य नेतृत्व
भारतीय सैन्य अकादमी की स्थापना 1 अक्टूबर 1932 को हुई थी। स्थापना के बाद से अब तक 65 हजार से अधिक कैडेट्स यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय सेना और विभिन्न मित्र देशों की सेनाओं में अधिकारी बन चुके हैं। दुनिया की प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थाओं में शामिल आईएमए अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने के लिए जाना जाता है।
केवल परेड नहीं, सपनों की उड़ान का क्षण
हर कैडेट के लिए पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य समारोह नहीं होती, बल्कि वर्षों की मेहनत, त्याग और कठिन प्रशिक्षण का परिणाम होती है। इसी परेड के साथ एक कैडेट की यात्रा सैन्य अधिकारी के रूप में शुरू होती है। इस वर्ष पहली बार महिला अधिकारी कैडेट्स की मौजूदगी ने इस गौरवशाली परंपरा को और भी ऐतिहासिक बना दिया।
भारतीय सैन्य अकादमी की इस ऐतिहासिक परेड ने यह संदेश दिया है कि देश की बेटियां अब केवल हर क्षेत्र में अपनी पहचान नहीं बना रहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और सैन्य नेतृत्व में भी नई इबारत लिख रही हैं।
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