“Iran-US Deal 2026: अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौता हुआ है। इसके तहत होर्मुज स्ट्रेट खोला जाएगा, ईरान को 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज मिलेगा और परमाणु हथियार कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी होगी।“
ईरान को खोलना होगा होर्मुज स्ट्रेट, मिलेंगे 300 अरब डॉलर; अमेरिका-तेहरान के 14 सूत्रीय समझौते में क्या-क्या है?
युद्ध विराम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति, परमाणु कार्यक्रम, तेल निर्यात और प्रतिबंधों पर हुए बड़े फैसले
वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण 14 सूत्रीय अंतरिम समझौता सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी नेतृत्व के बीच बनी सहमति को क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। समझौते के तहत ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए तत्काल कदम उठाएगा, जबकि अमेरिका प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक सहयोग का रास्ता तैयार करेगा।
होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर बनी सहमति
समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर पड़ा था। समझौते के तहत ईरान अब इस मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
ईरान को मिलेगा 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज
समझौते के अनुसार युद्ध से प्रभावित ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का विशेष फंड उपलब्ध कराया जाएगा। यह फंड क्षेत्रीय सहयोगी देशों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग से तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे, ऊर्जा क्षेत्र और आर्थिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करना है।
परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान
समझौते में ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और न ही उसके विकास की दिशा में कोई कदम उठाएगा। इसके साथ ही ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार और परमाणु गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी का भी प्रावधान रखा गया है।
तेल निर्यात पर मिलेगी राहत
अमेरिका ने संकेत दिया है कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की स्वतंत्रता दी जाएगी। साथ ही भविष्य में परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौता होने के बाद अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।
60 दिन तक चलेगी अंतिम समझौते की वार्ता
दोनों देशों ने अगले 60 दिनों के भीतर व्यापक और अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। इस दौरान दोनों पक्ष सैन्य तनाव कम करने और विश्वास बहाली के उपायों पर काम करेंगे।
समझौते की प्रमुख शर्तें
- अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकेंगे।
- दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे।
- आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
- होर्मुज स्ट्रेट को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोला जाएगा।
- ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
- तेल निर्यात पर लगी बाधाओं में राहत दी जाएगी।
- अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था लागू होगी।
- 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड की व्यवस्था की जाएगी।
- अंतिम समझौते के लिए 60 दिन की वार्ता चलेगी।
- अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों में राहत की प्रक्रिया शुरू होगी।
वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल मध्य पूर्व में शांति बहाल करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि समझौते के अंतिम क्रियान्वयन और ईरान की अनुपालन प्रक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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