“Karnataka Politics News 2026: कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात की। दोनों नेताओं की नाश्ते पर बैठक, गले मिलने और पैर छूने की तस्वीरों ने राजनीतिक चर्चाएं तेज कर दी हैं। जानिए इसके सियासी मायने।“
बेंगलुरु/नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में जारी सत्ता संघर्ष के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मुलाकात ने सियासी हलचल और तेज कर दी है। गुरुवार सुबह बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई नाश्ते की बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया, जबकि डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पैर छूकर सम्मान जताया। इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

बैठक ऐसे समय हुई है, जब राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं चरम पर हैं। लंबे समय से यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक में सत्ता और संगठन के बीच नया संतुलन बनाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की यह मुलाकात महज औपचारिक नहीं मानी जा रही।
गले मिलने और पैर छूने के पीछे क्या संदेश?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री के पैर छूना केवल व्यक्तिगत सम्मान का संकेत नहीं, बल्कि पार्टी और समर्थकों को एकता का संदेश देने की कोशिश भी है। कांग्रेस नहीं चाहती कि नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच गुटबाजी खुलकर सामने आए।

दोनों नेताओं का सार्वजनिक तौर पर गले मिलना यह संकेत देने की कोशिश माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर सबकुछ सामान्य है और कोई टकराव नहीं है। हालांकि अंदरखाने चल रही राजनीतिक कवायद को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।
बैठक में हो सकता है बड़ा फैसला
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में कर्नाटक कांग्रेस के भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चा हो सकती है। पार्टी हाईकमान राज्य में आगामी राजनीतिक रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि 2028 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती।
डीके शिवकुमार लंबे समय से मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जाते रहे हैं। 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर उनके और सिद्धारमैया के बीच रस्साकशी सामने आई थी। उस समय पार्टी ने अनुभव और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी।
सिद्धारमैया को दिल्ली लाने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने और पार्टी में बड़ी राष्ट्रीय भूमिका देने का प्रस्ताव रखा है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सिद्धारमैया दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं।
हालांकि खबरें यह भी हैं कि सिद्धारमैया फिलहाल राज्य की राजनीति छोड़ने के इच्छुक नहीं हैं। राज्यसभा नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून होने के कारण कांग्रेस नेतृत्व उन्हें मनाने की कोशिश में जुटा हुआ है।
अगर सिद्धारमैया दिल्ली की भूमिका स्वीकार करते हैं, तो इससे कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ हो सकता है और डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है कर्नाटक?
कर्नाटक फिलहाल दक्षिण भारत में कांग्रेस का सबसे मजबूत राज्य माना जाता है। ऐसे में पार्टी यहां किसी भी प्रकार की अंदरूनी कलह या अस्थिरता नहीं चाहती। बीजेपी और जेडीएस गठबंधन लगातार कांग्रेस सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब राज्य स्तर पर मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है। डीके शिवकुमार को संगठन और संसाधन प्रबंधन में मजबूत माना जाता है, जबकि सिद्धारमैया ओबीसी और ग्रामीण वर्ग में मजबूत पकड़ रखते हैं। ऐसे में पार्टी दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहती है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है हलचल
फिलहाल कांग्रेस की ओर से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों ने अटकलों को और तेज कर दिया है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कांग्रेस हाईकमान इस मुद्दे पर बड़ा फैसला ले सकता है।
कर्नाटक की राजनीति में फिलहाल हर नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सिद्धारमैया दिल्ली जाएंगे और क्या डीके शिवकुमार को आखिरकार मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलेगा।
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