“यूपी के ललितपुर और विंध्य पर्वत में फॉस्फोराइट का बड़ा भंडार मिला है। उत्तर प्रदेश सरकार ने खनन शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है। खनन शुरू होने पर दलहन, बागवानी और कृषि क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ललितपुर और विंध्य पर्वत श्रंखला में फॉस्फोराइट (Phosphorite) के महत्वपूर्ण भंडार मिलने के बाद राज्य सरकार ने इसके व्यावसायिक खनन की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक अनुमति (NOC) मांगी है। अनुमति मिलने के बाद इन क्षेत्रों में खनन कार्य शुरू किया जाएगा।
फॉस्फोराइट फॉस्फोरस का प्रमुख स्रोत है, जिसका उपयोग उर्वरक (फर्टिलाइज़र) बनाने में किया जाता है। इसके स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से उत्तर प्रदेश के किसानों को उर्वरक की लागत कम होने और कृषि उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
चार ब्लॉकों में मिला फॉस्फोराइट, तीन कंपनियों ने दिखाई रुचि
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अनुसार ललितपुर और विंध्य पर्वत क्षेत्र में फॉस्फोराइट के चार ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। इन ब्लॉकों के खनन के लिए तीन निजी कंपनियों ने रुचि दिखाई है। हालांकि, खनन शुरू होने से पहले केंद्र सरकार से वन एवं पर्यावरण संबंधी मंजूरी आवश्यक है। इसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
किसानों को होगा सीधा लाभ
फॉस्फोराइट से बनने वाले फॉस्फेट उर्वरक का उपयोग विशेष रूप से दलहनी फसलों, बागवानी, फल उत्पादन और पुष्प खेती में किया जाता है। अभी उत्तर प्रदेश को फॉस्फोरस आधारित खनिज और उर्वरकों के लिए बड़े पैमाने पर राजस्थान सहित अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय उत्पादन शुरू होने से परिवहन लागत कम होगी और किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे।
खनन से बढ़ा राज्य का राजस्व
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव के अनुसार वर्ष 2017 के बाद राज्य में खनन व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है। विभाग ने मौरंग, बालू और पत्थर के खनन से पिछले नौ वर्षों में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है, जबकि वर्ष 2017 तक यह आंकड़ा करीब 4,700 करोड़ रुपये था।
अवैध खनन पर सख्ती
विभाग ने अब तक 66 अवैध खनन क्षेत्रों की पहचान कर कार्रवाई की है। इसके साथ ही आधुनिक तकनीक के जरिए खनन गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।
नई तकनीक से होगी निगरानी
खनन विभाग ने इंटीग्रेटेड माइनिंग सर्विलांस सिस्टम (IMSS), जियो-फेंसिंग, RFID टैग, AI और IoT आधारित चेकगेट जैसी आधुनिक तकनीकों को लागू किया है। इससे अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिल रही है।
अन्य खनिजों पर भी शोध जारी
फॉस्फोराइट के अलावा राज्य सरकार लौह अयस्क, अभ्रक (Mica), चूना पत्थर (Limestone), संगमरमर (Marble) और सिलिका सैंड (Silica Sand) जैसे खनिजों की उपलब्धता पर भी वैज्ञानिक अध्ययन करा रही है। इन खनिजों के दोहन से राज्य की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है।
एम-सैंड नीति से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
राज्य सरकार एम-सैंड नीति-2024 के तहत वैकल्पिक निर्माण सामग्री को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और टिकाऊ निर्माण व्यवस्था विकसित करना है। विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और राजस्व में वृद्धि पर लगातार काम किया जा रहा है।
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