लखनऊ में 24वां सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार: 135 बटुकों का उपनयन, वैदिक मंत्रों से गूंजा परिसर

अखिल भारतीय ब्रह्म समाज के आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ संस्कार, 2000 से अधिक लोग हुए शामिल

Akhil Bharatiya Brahm Samaj द्वारा अक्षय तृतीया पर लखनऊ में 24वां सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार आयोजित, 135 बटुकों का उपनयन और 2000 लोगों की सहभागिता।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय अखिल भारतीय ब्रह्म समाज द्वारा अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 24वें सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नया हनुमान मंदिर परिसर के विशाल सभागार में सम्पन्न हुआ।

समारोह का शुभारंभ संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी. पी. अवस्थी, राष्ट्रीय महामंत्री देवेंद्र शुक्ला, कोषाध्यक्ष प्रेम कुमार मिश्रा एवं कार्यवाहक अध्यक्ष कोमल द्विवेदी द्वारा भगवान भगवान परशुराम की स्तुति के साथ किया गया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ संस्कार

देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों—काशीधाम, चित्रकूटधाम और नैमिषारण्य—से पधारे आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न कराया। बटुकों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परंपरा का निर्वहन किया।

भिक्षाटन और गायत्री मंत्र दीक्षा

संस्कार के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत बटुकों ने भिक्षाटन की प्रक्रिया निभाई, जिसमें परिजनों ने उन्हें भिक्षा, उपहार और मिष्ठान्न प्रदान किया। इसके बाद आचार्यों द्वारा बटुकों को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई।

काशी अध्ययन’ बना आकर्षण

संस्कार पूर्ण होने के पश्चात बटुकों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर दंड लेकर ‘काशी अध्ययन’ के प्रतीकात्मक कार्यक्रम में भाग लिया, जो समारोह का मुख्य आकर्षण रहा।

135 बटुकों का हुआ उपनयन

इस वर्ष कुल 135 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न कराया गया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंगनाथ पाण्डेय सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और बटुकों को आशीर्वाद दिया।

2000 से अधिक लोगों ने किया सहभाग

मीडिया प्रभारी अर्जुन द्विवेदी के अनुसार, आयोजन में संगठन के राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। समारोह के अंत में आयोजित सामूहिक भोज में लगभग 2000 से अधिक लोगों ने सहभागिता की।

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आयोजित यह सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का भी एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।

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