“Gujarat Cyber Fraud 2500 Crore मामले में राजकोट में बड़ा खुलासा, 20 आरोपी गिरफ्तार, 85 फर्जी बैंक खाते पकड़े गए। प्राइवेट बैंक अधिकारियों की भूमिका सामने आई।“
हाइलाइट्स:
- 2500 करोड़ रुपये का बड़ा साइबर फ्रॉड उजागर
- निजी बैंकों के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई
- अब तक 20 आरोपियों की गिरफ्तारी
- 85 फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल
- 535 से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज
राजकोट/नई दिल्ली। गुजरात के राजकोट में करीब 2500 करोड़ रुपये के बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में निजी बैंकों के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।
मामले की जांच कर रही राजकोट (ग्रामीण) पुलिस के अनुसार, इस संगठित गिरोह ने फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के आधार पर बड़ी संख्या में बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों का इस्तेमाल अवैध लेन-देन और साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
जांच में सामने आया है कि Yes Bank, Axis Bank और HDFC Bank के कुछ अधिकारियों ने इस नेटवर्क को सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने जिन तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, वे खातों के संचालन, सत्यापन और नकदी निकासी में सीधे तौर पर शामिल थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने करीब 85 फर्जी बैंक खातों का नेटवर्क तैयार किया था। इन खातों के जरिए साइबर अपराध से हासिल रकम को पहले छोटे-छोटे हिस्सों में ट्रांसफर किया जाता था, ताकि बैंकिंग अलर्ट सिस्टम को धोखा दिया जा सके। इसके बाद यह पैसा हवाला चैनलों के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों तक पहुंचाया जाता था।
इस पूरे रैकेट का खुलासा तब हुआ जब National Cyber Crime Reporting Portal पर लगातार शिकायतें दर्ज होने लगीं। अब तक इस मामले में 535 से अधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें अलग-अलग राज्यों के पीड़ित शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और तकनीकी खामियों के साथ-साथ अंदरूनी मिलीभगत का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये का घोटाला कर चुका है। फिलहाल गिरफ्तार सभी आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।
जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार किन-किन राज्यों और अंतरराष्ट्रीय ठिकानों से जुड़े हुए हैं। साथ ही अन्य बैंक कर्मचारियों और सहयोगियों की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।
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