“कानपुर में 22 अप्रैल को श्रद्धांजलि कार्यक्रम, पति शुभम की यादों को जिंदा रखने की पहल; सभी पीड़ितों को ‘शहीद’ का दर्जा देने की मांग“
हाइलाइट्स:
- पहलगाम हमले की 22 अप्रैल को पहली बरसी
- कानपुर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन
- ऐशान्या बोलीं—मुआवजा-नौकरी सरकार का दायित्व
- सभी पीड़ितों को ‘शहीद’ का दर्जा देने की मांग
- शुभम के नाम पर ट्रस्ट बनाने की तैयारी
कानपुर/पहलगाम, संवाददाता। कानपुर के कारोबारी शुभम द्विवेदी की पहलगाम आतंकी हमले में हुई हत्या को एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। 22 अप्रैल को इस घटना की बरसी पर कानपुर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें हमले में जान गंवाने वाले सभी लोगों को नमन किया जाएगा।
शुभम की पत्नी ऐशान्या इस कार्यक्रम की तैयारियों में जुटी हैं। उनका कहना है कि वे अपने पति की यादों को जिंदा रखना चाहती हैं और चाहती हैं कि देश उन पीड़ित परिवारों के दर्द को न भूले, जिन्होंने इस हमले में अपने प्रियजनों को खोया।
ऐशान्या ने स्पष्ट कहा कि मुआवजा और नौकरी देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन वह इसके लिए किसी के आगे मांग करने नहीं जाएंगी। उनका कहना है कि “यह मेरा अधिकार नहीं, सरकार का दायित्व है।”
उन्होंने सभी पीड़ितों को ‘शहीद’ का दर्जा देने की मांग करते हुए कहा कि यह केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की आवाज है, जिन्होंने इस हमले में अपनों को खोया। उनके मुताबिक, हमले से प्रभावित कई परिवार अब भी न्याय और सम्मान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
घटना को याद करते हुए ऐशान्या ने बताया कि वह दर्दनाक मंजर आज भी उनकी आंखों से ओझल नहीं होता। उन्होंने कहा कि हमले के दौरान आतंकियों ने धार्मिक पहचान पूछने के बाद उनके पति को बेहद करीब से गोली मार दी। उस घटना की भयावहता आज भी उन्हें मानसिक रूप से झकझोर देती है।
उन्होंने कहा कि शादी के महज दो महीने बाद ही उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। “यह दर्द शायद जिंदगी भर खत्म नहीं होगा,” उन्होंने भावुक होते हुए कहा।
परिवार अब शुभम द्विवेदी के नाम पर एक ट्रस्ट बनाने की योजना भी बना रहा है, जिससे समाजसेवा के कार्य किए जा सकें और उनकी याद को स्थायी रूप दिया जा सके।
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