“लखनऊ के लेवाना होटल अग्निकांड को तीन साल पूरे होने के बावजूद जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। 2022 में हुए इस हादसे में चार लोगों की मौत हुई थी। अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों और अधिकारियों की जवाबदेही पर अब भी सवाल बने हुए हैं।“
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के चर्चित लेवाना होटल अग्निकांड को तीन वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन हादसे की जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है। पांच सितंबर 2022 को हुए इस भीषण अग्निकांड में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि 24 लोगों को बचाया गया था। घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और होटल प्रबंधन की भूमिका की जांच शुरू हुई थी, लेकिन कार्रवाई रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आ सकी है।
तीन साल बाद भी अधूरी जवाबदेही
लेवाना होटल अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी थी। रिपोर्ट में इंजीनियरिंग सेवा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। हालांकि शासन ने यह सवाल उठाया था कि केवल इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों को ही जिम्मेदार क्यों माना गया, जबकि होटल के निर्माण और संचालन से जुड़े अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए थी।
घटना के बाद तत्कालीन एलडीए उपाध्यक्ष इंद्रमणि त्रिपाठी ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति में सचिव पवन कुमार गंगवार, मुख्य अभियंता अवधेश तिवारी, वित्त नियंत्रक दीपक सिंह और मुख्य नगर नियोजक नितिन मित्तल शामिल थे।
अवैध निर्माण और मिलीभगत के आरोप
जांच समिति ने अपनी पड़ताल में पाया था कि वर्ष 2017 से विभिन्न पदों पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित रूप से बिल्डर के साथ मिलीभगत कर अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की। जांच में यह भी सवाल उठा कि अग्नि सुरक्षा प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने और भवन के अग्रभाग पर सुरक्षा मानकों का पालन न किए जाने के बावजूद होटल को अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) कैसे जारी किया गया।
तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने भी इसे गंभीर जांच का विषय बताया था।
सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी अधर में
हादसे के बाद होटल को लेकर नोटिस जारी किए गए थे। संबंधित जोनल अधिकारी ने मई 2023 में नोटिस दिया था और जवाब न मिलने पर दूसरा नोटिस भी जारी किया गया। होटल को सील कर ध्वस्त करने की संस्तुति की गई थी, लेकिन यह कार्रवाई अब तक पूरी नहीं हो सकी।
मामले की जांच बाद में कानपुर मंडल के आयुक्त को सौंप दी गई थी। एलडीए अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने की सूचना है, लेकिन अंतिम कार्रवाई रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
एसएसजे और विराट होटल अग्निकांड की भी यादें ताजा
लेवाना अग्निकांड ने राजधानी में पहले हुए होटल हादसों की याद भी ताजा कर दी है। 19 जून 2018 को लखनऊ के एसएसजे इंटरनेशनल होटल और उससे सटे विराट होटल में भीषण आग लग गई थी। एयर कंडीशनर में शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई आग ने दोनों होटलों को चपेट में ले लिया था।
उस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। जांच में अग्नि सुरक्षा उपायों की भारी कमी सामने आई थी। बाद में जांच में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठे थे।
मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद हुई थी कार्रवाई
एसएसजे और विराट होटल अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विस्तृत जांच कराई गई थी। जांच में एलडीए के कई अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी पाया गया था। तत्कालीन आवास आयुक्त की रिपोर्ट के आधार पर 21 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई थी तथा कुछ मामलों में पेंशन से कटौती कर वसूली भी की गई थी।
सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
लेवाना होटल अग्निकांड की रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से न केवल पीड़ित परिवारों में नाराजगी है, बल्कि शहर में व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल होगा।
तीन साल बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय और जिम्मेदारों की जवाबदेही का इंतजार है, जबकि राजधानी में अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर बहस लगातार जारी है।
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