“मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार ने 30 दिन का विशेष प्रवर्तन एवं रोकथाम अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। होटल, गेस्ट हाउस, कोचिंग सेंटर, नर्सिंग होम और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की फायर सेफ्टी जांच होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीलिंग और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।“
नई दिल्ली। मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। राजधानी में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए गुरुवार से एक महीने का व्यापक प्रवर्तन एवं रोकथाम अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत होटल, लॉज, गेस्ट हाउस, कोचिंग संस्थान, नर्सिंग होम, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की गहन जांच की जाएगी।
दिल्ली सरकार के गृह विभाग को इस विशेष अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है। मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त स्वयं आगामी 30 दिनों तक अभियान की निगरानी करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ तत्काल सीलिंग और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अग्निकांड के बाद हुई उच्च स्तरीय बैठक
मालवीय नगर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद उपराज्यपाल टी.एस. संधू और दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में बुधवार को उच्च स्तरीय आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में हादसे की समीक्षा करने के साथ-साथ राजधानी में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई।
प्रशासन ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। जांच संबंधित जिले के जिलाधिकारी (डीएम) की निगरानी में होगी और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी।
पूरे शहर में चलेगी व्यापक जांच
अभियान के तहत राजधानी के सभी होटल, गेस्ट हाउस, लॉज, नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटर, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी मानकों की जांच की जाएगी। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक संस्थान में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास मार्ग, पानी के टैंक और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं पूरी तरह कार्यशील हों।
इसके लिए जिलाधिकारी, पुलिस उपायुक्त (डीसीपी), एमसीडी अधिकारियों और फायर विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं, जो जमीनी स्तर पर निरीक्षण और कार्रवाई करेंगी।
अतिरिक्त कमरों और अवैध निर्माण पर गिरेगी गाज
सरकार ने स्पष्ट किया है कि होटल और लॉज में स्वीकृत क्षमता से अधिक संचालित किए जा रहे कमरों को तत्काल बंद कराया जाएगा। जिन संस्थानों में अवैध निर्माण या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उन्हें सील कर दिया जाएगा।
प्रशासन ने सभी व्यावसायिक परिसरों को 15 दिन का समय देते हुए निर्देश दिया है कि वे अपने फायर सेफ्टी उपकरण, पानी की टंकियों और जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त कर लें। इसी अवधि में इन इमारतों का सुरक्षा ऑडिट भी कराया जाएगा।
होटल एसोसिएशनों को दी जाएगी चेतावनी
दिल्ली पुलिस, नगर निगम और पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से होटल एवं आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों में संस्थानों को फायर सेफ्टी और लाइसेंसिंग नियमों के पालन के लिए सख्त निर्देश दिए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है, इसलिए अब लापरवाही के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी।
जनता भी बनेगी निगरानी का हिस्सा
अभियान के दौरान आम नागरिकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। फायर विभाग एक सप्ताह के भीतर विशेष हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी जारी करेगा, जहां नागरिक नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों की शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित संस्थानों की जांच की जाएगी।
फायर ब्रिगेड की पहुंच में आने वाली बाधाएं हटेंगी
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन क्षेत्रों में संकरी गलियों, अतिक्रमण या अन्य अवरोधों के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पहुंचने में दिक्कत होती है, वहां विशेष सर्वे कराया जाएगा।
दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और संबंधित भूमि स्वामी एजेंसियां संयुक्त रूप से ऐसे क्षेत्रों की पहचान करेंगी। जहां संभव होगा, वहां अतिक्रमण हटाया जाएगा और अन्य स्थानों पर वैकल्पिक अग्निशमन व्यवस्था विकसित की जाएगी।
आरडब्ल्यूए और व्यावसायिक भवनों को भी जिम्मेदारी
सरकार ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) और व्यावसायिक भवनों के प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर पर भी फायर सेफ्टी उपकरणों और जलापूर्ति व्यवस्था की जांच करें तथा सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही फायर सेफ्टी से जुड़ी विस्तृत जानकारी डिजिटल माध्यम से सभी संस्थानों और आरडब्ल्यूए को भेजी जाएगी, ताकि वे समय रहते कमियों को दूर कर सकें।
पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता
मालवीय नगर हादसे के पीड़ितों के लिए दिल्ली सरकार ने तत्काल राहत उपायों की भी घोषणा की है। घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मृतकों की पहचान के लिए डीएनए जांच कराई जाएगी। प्रशासन पीड़ित परिवारों तथा विदेशी नागरिकों के मामलों में संबंधित दूतावासों से भी संपर्क करेगा। अंतिम संस्कार, दफन या शवों को उनके गृह स्थान तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था प्रशासन द्वारा की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में बढ़ती आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच फायर सेफ्टी नियमों का कड़ाई से पालन अत्यंत आवश्यक है। मालवीय नगर की त्रासदी ने सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों को उजागर किया है।
दिल्ली सरकार का यह 30 दिवसीय महाअभियान राजधानी में अग्नि सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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