कंबोडिया मानव तस्करी और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े मेरठ के अलेक रजा और शुभम चौधरी, ईडी की जांच तेज

नौकरी के नाम पर युवाओं को कंबोडिया भेजने का आरोप, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्तियों की भी हो रही पड़ताल

मेरठ मानव तस्करी साइबर धोखाधड़ी मामला में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अलेक रजा और शुभम चौधरी से पूछताछ की है। कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी, साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच तेज हो गई है।

मेरठ। कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क की जांच में मेरठ के अलेक रजा और शुभम चौधरी के तार सामने आए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दोनों आरोपितों से पूछताछ करते हुए उनके वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और संपत्तियों की गहन जांच शुरू कर दी है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, भारत और कंबोडिया में सक्रिय एक संगठित गिरोह मानव तस्करी, साइबर अपराध और उससे अर्जित धन को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रिंग) के नेटवर्क में शामिल रहा है। ईडी की कार्रवाई दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे और दाखिल चार्जशीट के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेजने का आरोप

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अलेक रजा और शुभम चौधरी कथित तौर पर लोगों को विदेश में आकर्षक नौकरी दिलाने का झांसा देकर कंबोडिया भेजने में मदद करते थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को विदेश ले जाकर जबरन साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों में लगाया जाता था।

मेरठ और मवाना में ईडी की छापेमारी

ईडी की दो अलग-अलग टीमों ने अलेक रजा के मवाना स्थित आवास और शुभम चौधरी के सांधन स्थित घर पर पहुंचकर जांच की। अधिकारियों ने दस्तावेजों की पड़ताल के साथ परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की।

सूत्रों के अनुसार, अलेक रजा और उसके पिता से घंटों पूछताछ की गई। वहीं शुभम चौधरी के परिजनों से बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों के संबंध में जानकारी जुटाई गई।

रिश्तेदारों तक पहुंची हो सकती है अवैध कमाई

ईडी को संदेह है कि अपराध से अर्जित धन को आरोपितों ने अपने रिश्तेदारों या अन्य लोगों के खातों के माध्यम से खपाने की कोशिश की हो सकती है। इसी वजह से एजेंसी पूरे वित्तीय नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है।

अधिकारियों का मानना है कि मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अवैध कमाई को वैध दिखाने का प्रयास किया गया हो सकता है। इसी कारण बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्तियों और लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है।

2024 में हो चुकी है गिरफ्तारी

ईडी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला वर्ष 2024 से जुड़ा हुआ है। इसी प्रकरण में अलेक रजा को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा गया था। हालांकि वर्तमान में वह जमानत पर बाहर है।

पुलिस भी रही तैनात

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस को भी तैनात किया गया था। अभिजीत कुमार ने बताया कि ईडी की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस बल उपलब्ध कराया गया था।

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