मेरठ, उत्तर प्रदेश। मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की जेल में पहचान बदल गई है। दोनों को क्रमशः कैदी नंबर 395 और 396 आवंटित किए गए हैं। निचली अदालत के फैसले के बाद दोनों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। जेल प्रशासन के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया में उनकी सहायता के लिए अधिवक्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को जेल में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कैदी नंबर और कपड़े उपलब्ध कराए गए। उनकी बैरक में भी बदलाव किया गया है। आगे उन्हें सेंट्रल जेल भेजे जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित बताई गई है।
साहिल को कैदी नंबर 395, मुस्कान को मिला 396
अदालत के फैसले के बाद जिला कारागार में साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की पहचान अब उनके कैदी नंबर से होगी। साहिल को नंबर 395 और मुस्कान को नंबर 396 दिया गया है।
जेल प्रशासन की ओर से बताया गया कि अदालत का फैसला आने के बाद दोनों के लिए जेल की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। जेल में बंद किसी व्यक्ति की पहचान और उसके रहने की व्यवस्था जेल प्रशासन के निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है।
इस मामले में सजा सुनाए जाने के बाद दोनों की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी ध्यान केंद्रित हो गया है।
फांसी की सजा सुनते ही रो पड़े दोनों
जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने बुधवार को शाम करीब 4:15 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साहिल और मुस्कान को सजा सुनाई। सजा की जानकारी मिलने पर दोनों रोने लगे।
रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों को उम्मीद थी कि अदालत उन्हें उम्रकैद की सजा सुना सकती है। फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद वे भावुक हो गए और उनकी काउंसलिंग कराई गई।
उस समय मुस्कान की गोद में मौजूद बच्ची को वहां के कर्मचारियों ने संभाला। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में बच्ची की देखभाल में महिला बंदियों ने भी मदद की।
हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देंगे साहिल-मुस्कान
निचली अदालत से फांसी की सजा मिलने के बाद साहिल और मुस्कान ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। जेल प्रशासन की ओर से भी उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
मृत्युदंड के मामलों में दोषसिद्धि और सजा की न्यायिक समीक्षा के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित उच्च न्यायालय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए निचली अदालत के फैसले के बाद आगे की कानूनी कार्यवाही और उस पर आने वाले निर्णय इस मामले में अहम होंगे।
फिलहाल, दोनों की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात सामने आई है। अपील दायर होने, उस पर सुनवाई और आगे के न्यायिक आदेशों की स्थिति अलग-अलग चरणों में स्पष्ट होगी।
165 पन्नों के फैसले में अदालत ने सुनाई सजा
प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। वहीं, अदालत का निर्णय 165 पन्नों का बताया गया है।
जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने साहिल और मुस्कान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश ने जिस पेन से निर्णय लिखा था, उसे तोड़कर निर्णय की फाइल में सुरक्षित रख दिया।
यह घटनाक्रम मामले की न्यायिक कार्यवाही से जुड़ा है। फैसले की विस्तृत कानूनी दलीलों और साक्ष्यों का सही आकलन करने के लिए अदालत के लिखित निर्णय का अध्ययन आवश्यक है।
क्या है नीला ड्रम हत्याकांड?
मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड गंभीर आपराधिक मामलों में चर्चा में रहा है। इस मामले में साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी के खिलाफ पुलिस ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया था। अब निचली अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया है।
हालांकि, फांसी की सजा सुनाया जाना और उस सजा का अंतिम रूप से लागू होना अलग-अलग कानूनी चरण हैं। दोनों की ओर से हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की बात सामने आने के बाद आगे की प्रक्रिया न्यायिक आदेशों के अनुसार चलेगी।
फिलहाल नजर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर: निचली अदालत के फैसले के बाद साहिल और मुस्कान के सामने अब कानूनी चुनौती का रास्ता है। उनकी अपील पर सुनवाई और अदालत के अगले आदेश इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे।
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