“जैन धर्म के पवित्र प्रतीक ‘पिच्छी’ को लेकर कथित टिप्पणी के बाद मेनका गांधी को जैन समाज ने कानूनी नोटिस भेजा है। समाज ने सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि माफी नहीं मिलने पर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।“
मुजफ्फरनगर। जैन धर्म के पवित्र प्रतीक ‘पिच्छी’ को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी की कथित टिप्पणी पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मुजफ्फरनगर में जैन समाज के विभिन्न संगठनों ने बैठक कर उनके बयान की कड़ी आलोचना की और कानूनी नोटिस भेजते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर माफी नहीं मांगी गई तो देशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
जैन अतिथि भवन में हुई सर्वसमाज की बैठक
मुजफ्फरनगर स्थित जैन अतिथि भवन में आयोजित बैठक में जैन समाज के विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रस्ताव पारित कर आंदोलन की रूपरेखा तय की गई।
निर्णय के अनुसार 30 जून को सोशल मीडिया के माध्यम से देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 7 जुलाई को देशभर के जैन मंदिरों के बाहर सुबह नौ बजे से 11 बजे तक शांतिपूर्ण मौन प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
इसके अलावा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे।
क्या है विवाद?
जैन समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार 17 जून को दिल्ली स्थित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मेनका गांधी ने कथित रूप से यह टिप्पणी की थी कि जैन मुनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छी के निर्माण के लिए बड़ी संख्या में मोरों को मारा जाता है।
जैन समाज का कहना है कि यह आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।
क्या होती है पिच्छी?
दिगंबर जैन मुनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छी मोर के प्राकृतिक रूप से झड़ चुके पंखों से बनाई जाती है। इसका उपयोग किसी जीव को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि छोटे जीव-जंतुओं की रक्षा और अहिंसा के सिद्धांत के पालन के लिए किया जाता है।
जैन समाज का कहना है कि पिच्छी जैन परंपरा और धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है और इसके संबंध में बिना तथ्यात्मक जानकारी के की गई टिप्पणियां समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं।
लीगल नोटिस भेजकर मांगा जवाब
सकल जैन समाज की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में मेनका गांधी से कथित बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
जैन संतों की सुरक्षा के लिए नीति बनाने की मांग
बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने सरकार से जैन संतों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की भी मांग की। उनका कहना है कि धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं पर बिना तथ्यों के की जाने वाली टिप्पणियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जैन समाज ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा, लेकिन धार्मिक सम्मान और अधिकारों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मेनका गांधी की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस विवाद पर मेनका गांधी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जैन समाज अब उनके जवाब और आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”









