राम मंदिर ट्रस्ट में बैंकिंग व्यवस्था बदली, कृष्णमोहन, जगदीश आफले और चंदन राय बने नई साइनिंग अथॉरिटी

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव करते हुए अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, जगदीश आफले और सीए चंदन राय को हस्ताक्षर का अधिकार दिया है। अब तीन में से दो अधिकृत हस्ताक्षरों से ट्रस्ट के सभी बैंक भुगतान किए जाएंगे।

अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन को सुचारु बनाए रखने के लिए नई साइनिंग अथॉरिटी तय कर दी है। ट्रस्ट ने अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, वरिष्ठ इंजीनियर जगदीश आफले और चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय को बैंकों में हस्ताक्षर करने का अधिकार प्रदान किया है। अब इन तीन अधिकृत सदस्यों में से किसी भी दो के संयुक्त हस्ताक्षर से ट्रस्ट के सभी बैंक संबंधी भुगतान किए जा सकेंगे।

इस निर्णय के बाद ट्रस्ट कर्मचारियों के वेतन, निर्माण कार्यों से जुड़े भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन में आ रही बाधाएं दूर होने की उम्मीद है।

दो हस्ताक्षरों से होंगे सभी भुगतान

नई व्यवस्था के तहत ट्रस्ट के बैंक खातों से किसी भी प्रकार का भुगतान तभी किया जाएगा, जब तीन अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में से दो के हस्ताक्षर होंगे। बैंक अधिकारियों के अनुसार इसी प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों के वेतन, निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और अन्य कार्यदायी संस्थाओं को भुगतान किया जाएगा।

ट्रस्ट प्रत्येक माह की 5 से 10 तारीख के बीच कर्मचारियों का वेतन उनके बैंक खातों में भेजता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भुगतान प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी रहेगी।

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद बदली व्यवस्था

ट्रस्ट की बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता जून में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद उत्पन्न हुई। मामले के सुर्खियों में आने के बाद तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद ट्रस्टी कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव का दायित्व सौंपा गया, लेकिन बैंक खातों के संचालन और भुगतान प्रक्रिया को लेकर तकनीकी अड़चनें सामने आने लगीं।

एसबीआई की आपत्ति से रुके थे भुगतान

ट्रस्ट ने शुरुआत में कृष्णमोहन के साथ पूर्व अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के नाम जोड़कर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और बैंक ऑफ बड़ौदा को प्रस्ताव भेजा था। हालांकि एसबीआई ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए केवल वर्तमान ट्रस्ट पदाधिकारियों के नाम शामिल करने की बात कही।

इस तकनीकी आपत्ति के कारण जुलाई माह में कर्मचारियों के वेतन को छोड़कर कई बड़े भुगतान प्रभावित हुए। जबकि पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा ने प्रस्ताव पर सहमति जता दी थी।

बातचीत के बाद निकला समाधान

एसबीआई की आपत्ति के बाद ट्रस्ट ने बैंक अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद संशोधित प्रस्ताव दोबारा भेजा गया, जिसमें कृष्णमोहन, जगदीश आफले और चंदन राय को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनाया गया।

इसके बाद एसबीआई ने भी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। बैंक अधिकारियों के अनुसार फिलहाल कृष्णमोहन और जगदीश आफले के संयुक्त हस्ताक्षर के आधार पर बैंकिंग लेनदेन की अनुमति प्रदान की गई है।

निर्माण कार्य और वित्तीय प्रक्रिया को मिलेगी गति

ट्रस्ट के इस निर्णय से राम मंदिर निर्माण से जुड़े भुगतान, कर्मचारियों के वेतन और अन्य वित्तीय दायित्वों का निर्वहन बिना किसी बाधा के हो सकेगा। साथ ही बैंकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए दोहरे हस्ताक्षर की व्यवस्था लागू की गई है। इससे मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

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