नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में होंगे शामिल, कांग्रेस छोड़ने के 20 दिन बाद बड़ा फैसला

नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल होने जा रहे हैं। 24 जनवरी को कांग्रेस छोड़ने वाले यूपी के वरिष्ठ मुस्लिम नेता ने अखिलेश यादव से बातचीत के बाद समाजवादी पार्टी जॉइन करने का फैसला किया है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम यूपी की राजनीति में बड़ा असर।

हाइलाइट्स:

  • नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल होने का फैसला
  • 24 जनवरी को कांग्रेस से दिया था इस्तीफा
  • अखिलेश यादव से कई दौर की बातचीत
  • पश्चिम यूपी में अहम जिम्मेदारी मिलने के संकेत
  • 73 कांग्रेस नेताओं ने भी छोड़ी थी पार्टी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। प्रदेश के कद्दावर मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि शुक्रवार शाम तक इसका आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, सिद्दीकी की अखिलेश यादव से कई दौर की बातचीत हो चुकी है। 15 से 20 फरवरी के बीच लखनऊ में अखिलेश यादव स्वयं उन्हें पार्टी की सदस्यता दिला सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उन्हें अहम जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।

24 जनवरी को छोड़ी थी कांग्रेस

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 24 जनवरी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे में उन्होंने लिखा था कि वे कांग्रेस में जातिवाद और संप्रदायवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने आए थे, लेकिन आठ साल तक जमीन पर सक्रिय भूमिका नहीं मिल सकी।

उन्होंने कहा था कि वे “फिरकापरस्तों को हराने वाली पार्टी” में शामिल होंगे या नई पार्टी बनाएंगे। उनके साथ 73 अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस छोड़ी थी, जिनमें कई पूर्व विधायक शामिल हैं।

कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी असहमति

सूत्रों के अनुसार, 2024 लोकसभा चुनाव में तवज्जो न मिलने और प्रदेश नेतृत्व में अपनी भूमिका सीमित होने से सिद्दीकी असंतुष्ट थे। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बढ़ता प्रभाव भी उनकी नाराजगी का कारण माना जा रहा है।

बताया जाता है कि एयरपोर्ट पर राहुल गांधी के स्वागत कार्यक्रम के दौरान भी उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं मिला था। हालांकि, इस्तीफे में उन्होंने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी के प्रति सम्मान व्यक्त किया था।

बसपा से कांग्रेस और अब सपा

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी राजनीतिक पारी बहुजन समाज पार्टी से शुरू की थी और मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। 2017 में बसपा से निष्कासन के बाद 2018 में वे कांग्रेस में शामिल हुए थे।

पश्चिमी यूपी के मुस्लिम वोट बैंक में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उनका सपा में शामिल होना प्रदेश की राजनीति में अहम माना जा रहा है।

फिलहाल, सपा की ओर से औपचारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

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