जलवायु परिवर्तन के प्रति क्रायोस्फीयर प्रतिक्रिया पर लखनऊ में राष्ट्रीय मंच, BGS ने किया ‘रॉक गार्डन’ का लोकार्पण

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, लखनऊ में ‘जलवायु परिवर्तन के प्रति क्रायोस्फीयर प्रतिक्रिया’ पर संगोष्ठी। हिमनद, ध्रुवीय अनुसंधान, GLOF जोखिम और नई प्रकाशनों का विमोचन।

रिपोर्ट–ज्ञानी त्रिवेदी

हाईलाइट्स

  • BGS की 175वीं वर्षगांठ के तहत लखनऊ में राष्ट्रीय संगोष्ठी
  • ‘रॉक गार्डन’ और हिमनद गतिविधियों पर विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन
  • हिमालय और ध्रुवीय क्षेत्रों में क्रायोस्फीयर परिवर्तन पर शोध प्रस्तुति
  • हिमनदों की नई सूची, लद्दाख संसाधन रिपोर्ट और BGS Records का विमोचन
  • GLOF–LLOF, जल उपलब्धता, जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु मॉडलिंग पर विशेषज्ञ चर्चाएँ

BGS लखनऊ में राष्ट्रीय संगोष्ठी: क्रायोस्फीयर की बदलती दुनिया पर मंथन

लखनऊ । भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (BGS) उत्तरी क्षेत्र–लखनऊ द्वारा 5 दिसंबर 2025 को “जलवायु परिवर्तन के प्रति क्रायोस्फीयर प्रतिक्रिया: एक हिमालीय और ध्रुवीय परिप्रेक्ष्य” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। यह आयोजन BGS की स्थापना के 175 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वर्ष–भर चलने वाले समारोह का महत्वपूर्ण भाग रहा।

दीप प्रज्वलन के साथ शुरुआत, ‘रॉक गार्डन’ और हिमनद प्रदर्शनी का लोकार्पण

श्री राजिंदर कुमार, अपर महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष, BGS–उत्तरी क्षेत्र ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसी अवसर पर “रॉक गार्डन” का लोकार्पण हुआ, जिसमें उत्तर भारत के प्रमुख शैल (Rocks) और उत्तर प्रदेश के भू-खतरों (State Geohazards) को मॉडल स्वरूप में प्रदर्शित किया गया।

इसके साथ ही हिमनद संबंधी गतिविधियों (Glacial Processes) को दर्शाती हुई विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन भी हुआ, जिसमें BGS के विभिन्न प्रभागों—पार्क एवं संग्रहालय, रसायन प्रभाग, भौतिक उपकरण विभाग आदि द्वारा प्रयोग होने वाले उपकरण, नमूनें और अनुसंधान मॉडल प्रस्तुत किए गए।

मुख्य प्रकाशनों का विमोचन: हिमालयी ग्लेशियरों से लद्दाख के संसाधनों तक

उद्घाटन सत्र में तीन महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन हुआ—

  1. हिमालय के ग्लेशियरों की सूची (Updated Glacier Inventory)
  2. केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के भूवैज्ञानिक एवं खनिज संसाधनों का विस्तृत विवरण
  3. BGS Records – Volume 158, Part 8

विशेषज्ञ व्याख्यान: हिमनदों की बदलती स्थिति और वैज्ञानिक चुनौतियाँ

पूर्व उप महानिदेशक श्री दीपक श्रीवास्तव ने Keynote Lecture में ग्लेशियरों की संरचना, संहति-संतुलन (Mass Balance), जलवायु प्रभाव एवं भविष्य की चुनौतियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
इसके बाद निदेशक श्री अजय कुमार और श्री प्रदीप कुमार ने हिमालय और ध्रुवीय क्षेत्रों में BGS द्वारा किए जा रहे क्रोनोलॉजी अध्ययन की समेकित रूपरेखा प्रस्तुत की।

संगोष्ठी के प्रमुख विषय

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को चार मुख्य वैज्ञानिक वर्गों में विभाजित किया गया था:

1. हिमनद एवं ध्रुवीय हिम-चादरें

  • ग्लेशियर मॉनिटरिंग
  • हिमनदीय संहति, लंबाई परिवर्तन
  • हिमनद गतिकी
  • हिमनदीय जल-विज्ञान
  • Glacier Catalogue Methods

2. जलवायु–क्रायोस्फीयर परस्पर क्रिया

  • हिमनद कालक्रम (Glacial Chronology)
  • Paleoclimate Reconstruction
  • Climate Impact Modelling
  • हिमालयी जलवायु परिवर्तन के प्रमाण

3. भू-दृश्य एवं अवसाद निर्माण

  • हिमनदीय अवसाद (Glacial Sediments)
  • परिहिमनदीय भू–दृश्य
  • रिमोट सेंसिंग एवं GIS का गहन उपयोग
  • अवसाद संरचनाएँ एवं प्रक्रियाएँ

4. सामुदायिक जोखिम और नीति निर्माण

  • हिमानी क्षेत्रों में जल उपलब्धता
  • ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF)
  • लैंडस्लाइड लेक आउटबर्स्ट (LLOF)
  • जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियाँ
  • हिमस्खलन एवं भू-खतरों पर तकनीकी समाधान

BGS का संदेश: विज्ञान, समाज और नीति के बीच मजबूत सेतु

संगोष्ठी का उद्देश्य हिमनदों के तेज़ी से बदलते स्वरूप, जलवायु जोखिम और उत्तर भारतीय समाज पर उनके व्यापक प्रभावों को समझना तथा वैज्ञानिक समुदाय व नीति निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करना था।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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