“नेपाल में बुलडोजर अभियान के बाद यूपी-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खुफिया रिपोर्ट में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ की आशंका जताई गई है। गोरखपुर, बलरामपुर समेत सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ा दी गई है।“
लखनऊ/गोरखपुर। नेपाल में अवैध निर्माण, झुग्गी-झोपड़ियों और सरकारी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ चल रहे बुलडोजर अभियान का असर अब भारत-नेपाल सीमा पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश से सटे सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया इकाइयों को अलर्ट पर रखा गया है। आशंका जताई जा रही है कि नेपाल में दबाव बढ़ने के बाद वहां रह रहे रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस की अभिसूचना इकाई नेपाल बॉर्डर (एनबी) शाखा की रिपोर्ट में इस खतरे को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल सरकार इन दिनों देशभर में अवैध कब्जों और बस्तियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला रही है। बुलडोजर कार्रवाई के तहत कई स्थानों पर अतिक्रमण हटाया जा रहा है। नेपाली सेना ने भी स्थानीय निकायों से अवैध बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तृत डेटा मांगा है।
काठमांडू समेत कई इलाकों में बढ़ा दबाव
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, काठमांडू के कपन क्षेत्र सहित नेपाल के कई हिस्सों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर दबाव बढ़ गया है। नेपाल में सक्रिय हिंदूवादी संगठन लगातार अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या समुदाय की बस्तियों को हटाने की मांग कर रहे हैं। इससे वहां रह रहे लोगों के सामने रोजगार, आवास और आजीविका का संकट गहराने लगा है।
एजेंसियों का मानना है कि ऐसे हालात में सीमावर्ती रास्तों के जरिए भारत में अवैध प्रवेश की कोशिशें बढ़ सकती हैं। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार से सटे नेपाल सीमा क्षेत्रों पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
नेपाली भाषा और फर्जी पहचान पत्र बने चुनौती
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नेपाल में रह रहे अधिकांश रोहिंग्या मुसलमान अब नेपाली भाषा भी सीख चुके हैं। इसके अलावा कुछ लोगों द्वारा अवैध तरीके से पहचान पत्र बनवाने की जानकारी भी एजेंसियों को मिली है। यही वजह है कि उनकी पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है।
खुफिया विभाग का कहना है कि कई संदिग्ध लोग नेपाली नागरिकों की तरह व्यवहार कर आसानी से सीमा पार करने का प्रयास कर सकते हैं। इसको देखते हुए सीमावर्ती जिलों में चौकसी और सत्यापन अभियान तेज कर दिए गए हैं।
बलरामपुर सीमा से सटे इलाकों में भी कार्रवाई
नेपाल में बलरामपुर जिले की सीमा से सटे गढ़वा गांव पालिका के कोईलावास वार्ड नंबर-8 में भी अवैध बस्तियों का चिन्हांकन शुरू कर दिया गया है। स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई का विरोध भी सामने आ रहा है। वहां के प्रधान अब्दुल खालिक सिद्दीकी ने अवैध रूप से रह रहे लोगों को कानूनी अधिकार और जमीन के दस्तावेज देने की मांग उठाई है।
सीमावर्ती जिलों में बढ़ाई गई निगरानी
सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती जिलों के पुलिस और खुफिया तंत्र को सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, सीमा क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और स्थानीय मुखबिर नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। एजेंसियों का मानना है कि नेपाल में हालात बिगड़ने की स्थिति में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ की कोशिशें बढ़ सकती हैं।
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में प्रशासन लगातार हालात की समीक्षा कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती से समय रहते निपटा जा सके।
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