भारत-बांग्लादेश के बीच नई भूकंप फॉल्ट लाइन—जमालपुर से कोलकाता तक फैला 400 KM का भूगर्भीय खतरा

भारत-बांग्लादेश के बीच नई भूकंप फॉल्ट लाइन की खोज ने खतरा बढ़ा दिया है। इंटरनेशनल रिसर्च टीम ने 400 किमी लंबी इस एक्टिव फॉल्ट लाइन का पता लगाया है, जो जमालपुर से कोलकाता तक फैली है और 6 तीव्रता तक के भूकंप पैदा कर सकती है।

कोलकाता भारत-बांग्लादेश के बीच नई भूकंप फॉल्ट लाइन की खोज ने पूरे पूर्वी भारत और पड़ोसी बांग्लादेश के लिए चिंता बढ़ा दी है। एक अंतरराष्ट्रीय भूकंप अनुसंधान टीम ने हाल ही में बांग्लादेश के जमालपुर क्षेत्र में भूमिगत नई एक्टिव फॉल्ट लाइन का पता लगाया है, जो लगभग 400 किलोमीटर तक फैली है और भारत के कोलकाता तक पहुंचती है।

400 किमी लंबी एक्टिव फॉल्ट लाइन

यह नई फॉल्ट लाइन जमालपुर (बांग्लादेश) से शुरू होकर पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ते हुए कोलकाता तक जाती है।
संशोधकों के अनुसार फॉल्ट लाइन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूरी तरह एक्टिव है और इसमें इतनी ऊर्जा जमा है कि यह
रिक्टर स्केल पर 6.0 तीव्रता तक के भूकंप पैदा कर सकती है।

 इंटरनेशनल रिसर्च टीम की रिपोर्ट

अध्ययन में शामिल वैज्ञानिकों का कहना है कि—

  • फॉल्ट लाइन में लगातार माइक्रो-मूवमेंट हो रहे हैं।
  • यह क्षेत्र खतरे के उच्च जोन में आता है।
  • ऊर्जा का दबाव बढ़ने से किसी भी समय मध्यम तीव्रता का भूकंप आ सकता है।

 किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा खतरा?

रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप का सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों में हो सकता है—

  • जमालपुर, ढाका (बांग्लादेश)
  • कोलकाता, नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदा (भारत)
  • त्रिपुरा और मेघालय के कुछ पूर्वी हिस्से

इन क्षेत्रों की मिट्टी मुलायम होने के कारण झटकों की तीव्रता और बढ़ सकती है।

 वैज्ञानिक क्यों चिंतित हैं?

पूर्वी भारत और बांग्लादेश पहले से ही सिस्मिक जोन-5 और जोन-4 में आते हैं, जहां भूकंप का खतरा अधिक होता है।
नई फॉल्ट लाइन मिलने के बाद—

  • भूकंप की फ्रीक्वेंसी बढ़ सकती है
  • रिक्टर स्केल की तीव्रता में उछाल की संभावना
  • घनी आबादी वाले इलाकों में भारी नुकसान की आशंका

 क्या कर रही हैं एजेंसियाँ?

  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI)
  • नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS)
  • बांग्लादेश की भूकंप एजेंसी

सभी मिलकर इस फॉल्ट लाइन की सतत मॉनिटरिंग कर रही हैं और अलर्ट मैप तैयार किया जा रहा है।

क्षेत्रीय सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण?

कोलकाता जैसे घनी आबादी वाले शहर पर भूकंप की हल्की तीव्रता का भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि—

  • पुरानी इमारतें
  • पानी से भरी मिट्टी
  • घनी बसावट
  • कमजोर संरचनाएँ

इन कारणों से भूकंप का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।

देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।

विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button