किम जोंग उन की सेना को मिलेगा नया घातक हथियार! उत्तर कोरिया ने क्लस्टर बम का किया परीक्षण

उत्तर कोरिया ने घातक क्लस्टर बम का परीक्षण किया है। बैलिस्टिक मिसाइल से दागे जाने वाले इस हथियार की मारक क्षमता 12-13 हेक्टेयर क्षेत्र तक बताई गई है। जानिए क्यों है यह खतरनाक।

प्योंगयांग: उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए घातक क्लस्टर बम वारहेड का परीक्षण किया है। यह हथियार सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल पर लगाया जा सकता है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के मुताबिक, परीक्षण में इस्तेमाल किए गए स्टैंडर्ड टाइप-2 क्लस्टर बम की क्षमता 12 से 13 हेक्टेयर क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाने की बताई गई है।

31 अक्टूबर को किए गए इस परीक्षण की जानकारी उत्तर कोरिया ने 1 नवंबर को सार्वजनिक की। इस घटनाक्रम के बाद कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य गतिविधियों और उत्तर कोरिया की हथियार क्षमता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उत्तर कोरिया ने संकेत दिया है कि साल 2026 के अंत तक विभिन्न प्रकार के क्लस्टर बम वारहेड अपनी सैन्य इकाइयों में शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, इनकी वास्तविक मारक क्षमता के स्वतंत्र सत्यापन की जानकारी उपलब्ध नहीं है। Yonhap News Agency+2

किस क्लस्टर बम का किया गया परीक्षण?

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के अनुसार, मिसाइल प्रशासन ने स्टैंडर्ड टाइप-2 क्लस्टर बम वारहेड का परीक्षण किया। इसका उद्देश्य सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल पर लगाए जाने वाले इस हथियार की युद्धक उपयोगिता और विनाशकारी क्षमता का आकलन करना था।

परीक्षण के बाद उत्तर कोरिया के रक्षा अनुसंधान संस्थानों ने दावा किया कि यह वारहेड अधिकतम घनत्व के साथ 12 से 13 हेक्टेयर क्षेत्र को तबाह करने में सक्षम है।

उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रशासन के एक अधिकारी के मुताबिक, क्लस्टर बम वारहेड को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। हालांकि, इन चारों श्रेणियों की विस्तृत तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। Yonhap News Agency+1

क्या होता है क्लस्टर बम, क्यों माना जाता है खतरनाक?

क्लस्टर बम सामान्य बमों से अलग तरह का हथियार होता है। इसमें एक मुख्य बम के भीतर कई छोटे विस्फोटक बम यानी सबम्यूनिशन मौजूद होते हैं। जब मुख्य बम हवा में खुलता है तो ये छोटे विस्फोटक बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं और अलग-अलग जगहों पर विस्फोट करते हैं।

इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही हथियार से बड़े इलाके में कई स्थानों को प्रभावित किया जा सकता है। यही वजह है कि सैन्य ठिकानों के साथ-साथ आबादी वाले क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल से आम नागरिकों को भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

इस हथियार का खतरा विस्फोट के बाद भी खत्म नहीं होता। कई छोटे बम जमीन पर गिरने के बाद नहीं फटते और लंबे समय तक विस्फोटक बने रहते हैं। बाद में इनके संपर्क में आने वाले नागरिकों, बच्चों और किसानों की जान भी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस समिति (ICRC) ने भी क्लस्टर हथियारों से नागरिकों को होने वाले गंभीर और लंबे समय तक बने रहने वाले खतरों पर चिंता जताई है। International Committee of the Red Cross+1

2026 के अंत तक सेना में शामिल करने की तैयारी

उत्तर कोरिया ने परीक्षण के बाद संकेत दिया है कि विभिन्न प्रकार के क्लस्टर बम वारहेड को 2026 के अंत तक सैन्य इकाइयों में शामिल किया जा सकता है।

KCNA के मुताबिक, इन हथियारों का इस्तेमाल सैन्य जरूरतों और अभियान के उद्देश्यों के आधार पर किया जाएगा। इससे उत्तर कोरिया की सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की क्षमता बढ़ाने की योजना का संकेत मिलता है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन सभी हथियारों का सैन्य स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन और तैनाती किस चरण में है। उत्तर कोरिया की ओर से किए गए क्षमता संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।

दक्षिण कोरिया ने अमेरिका के साथ साझा की परीक्षण की जानकारी

उत्तर कोरिया के इस परीक्षण के बाद दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसियों ने घटनाक्रम की जानकारी जुटाई और इसे अमेरिका के साथ साझा किया।

दक्षिण कोरिया की सेना और खुफिया तंत्र उत्तर कोरिया की मिसाइल तथा हथियार गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। ऐसे में बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए नए वारहेड का परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया हाल के दिनों में मिसाइल परीक्षणों और सैन्य गतिविधियों के जरिए अपनी हथियार क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। Yonhap News Agency+1

क्लस्टर बम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध क्यों लगाया गया?

क्लस्टर बम से नागरिक आबादी को होने वाले खतरे को देखते हुए वर्ष 2008 में क्लस्टर म्यूनिशन कन्वेंशन (Convention on Cluster Munitions) को अपनाया गया था। यह संधि 1 अगस्त 2010 से लागू हुई।

इस संधि के तहत सदस्य देशों को क्लस्टर हथियारों के इस्तेमाल, विकास, उत्पादन, अधिग्रहण, भंडारण और हस्तांतरण पर प्रतिबंध स्वीकार करना होता है। साथ ही विस्फोट के बाद बचे खतरनाक अवशेषों को हटाने और पीड़ितों की सहायता करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

संयुक्त राष्ट्र के 1 नवंबर 2026 के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, इस संधि के 112 सदस्य देश और 107 हस्ताक्षरकर्ता दर्ज हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दुनिया के सभी देशों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं है। उत्तर कोरिया और भारत इस संधि के पक्षकार नहीं हैं। United Nations Treaty Collection+2

उत्तर कोरिया के सैन्य कार्यक्रम पर दुनिया की नजर

उत्तर कोरिया का यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है, जब वह अपनी मिसाइल और रक्षा क्षमताओं को लगातार विकसित करने में जुटा है। नए क्लस्टर बम वारहेड का परीक्षण उसकी सामरिक सैन्य तैयारियों का हिस्सा है।

इस घटनाक्रम पर दक्षिण कोरिया और अमेरिका की निगरानी बनी हुई है। आने वाले समय में उत्तर कोरिया की ओर से इन हथियारों की तैनाती और आगे के परीक्षणों से जुड़ी जानकारी क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति को प्रभावित कर सकती है।

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