सपा में बड़ी टूट का दावा: राजभर बोले- सांसद बचाएं अखिलेश, कर्नाटक रिसॉर्ट प्लान नहीं होगा सफल

ओपी राजभर का दावा- सपा के कई सांसद नाराज, 'बागी बलिया' का सांसद संभाल सकता है मोर्चा; दलित उत्पीड़न के आंकड़ों को लेकर भी साधा निशाना

UP Politics 2026: सुभासपा अध्यक्ष ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी में संभावित टूट का दावा करते हुए अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला। सांसदों की नाराजगी, कर्नाटक रिसॉर्ट और सपा में अंदरूनी कलह को लेकर किए गए दावों से यूपी की राजनीति गरमा गई है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के भीतर संभावित टूट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया है कि सपा के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है और पार्टी के कई सांसद नेतृत्व से नाराज हैं।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर की गई अपनी टिप्पणी में राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपने सांसदों को बचाने की चिंता करें। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि “अखिलेश बाबू छुप-छुप कर मुंबई क्यों जा रहे हो? वहां तो केवल दो विधायक हैं, वे भी टूट जाएं तो कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन यहां जो लोग जाने की तैयारी में हैं, उन्हें कौन संभालेगा?”

कर्नाटक रिसॉर्ट की चर्चा पर तंज

राजभर ने दावा किया कि मानसून सत्र से पहले सपा नेतृत्व अपने सांसदों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कर्नाटक के किसी रिसॉर्ट में ले जाने की योजना बना रहा है, लेकिन यह योजना सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी में जिस तरह की अंदरूनी हलचल चल रही है, वह अब केवल अटकलों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि मामला काफी आगे बढ़ चुका है।

राजभर ने कहा कि उन्होंने पहले भी सपा में टूट की संभावना जताई थी और अब उनके पास ऐसे संकेत हैं जो उनके दावों को मजबूत करते हैं। हालांकि उन्होंने किसी सांसद का नाम नहीं लिया, लेकिन यह जरूर कहा कि संभावित बागी गुट का नेतृत्व बलिया क्षेत्र से जुड़े एक सांसद के हाथ में हो सकता है।

ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर भी उठाए सवाल

सुभासपा अध्यक्ष ने सपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां ब्राह्मण समाज का अपमान हुआ। उन्होंने कहा कि इस घटना से पार्टी के भीतर कई नेता और सांसद असहज हैं। राजभर ने संकेत दिया कि इसी वजह से कुछ सांसदों में नेतृत्व के प्रति नाराजगी बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि उनकी एक टिप्पणी पर जिस प्रकार सपा नेतृत्व और उसके समर्थक प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उससे बेहतर होता कि पार्टी नेतृत्व नाराज सांसदों को मनाने का प्रयास करता।

दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर भी घेरा

ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी द्वारा प्रदेश में दलितों पर अत्याचार के लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने पुलिस अभिलेखों का हवाला देते हुए दावा किया कि विभिन्न जोनों में दर्ज दलित उत्पीड़न के मामलों में बड़ी संख्या में आरोपी यादव और मुस्लिम समुदाय से जुड़े पाए गए हैं।

राजभर ने गोरखपुर, वाराणसी, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, बरेली और लखनऊ जोन के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने राजनीतिक और सामाजिक आधार से जुड़े मामलों पर भी आत्ममंथन करना चाहिए।

सपा की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया

राजभर के ताजा दावों और आरोपों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी मानसून सत्र और भविष्य के चुनावी समीकरणों को देखते हुए सपा के भीतर चल रही गतिविधियों पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि राजभर के दावों में कितनी सच्चाई है, लेकिन उनके लगातार बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। यदि आने वाले दिनों में सपा के किसी सांसद या नेता की ओर से असंतोष खुलकर सामने आता है तो यह मामला और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल कर सकता है।

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