“कांग्रेस के नए उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए बसपा सहित सभी विपक्षी और संविधान समर्थक दलों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि मायावती बातचीत के लिए बुलाती हैं तो वह उनसे मिलने जरूर जाएंगे।“
मुख बिंदु:
- राजेंद्र पाल गौतम ने विपक्षी दलों की एकजुटता पर जोर दिया।
- मायावती के बुलाने पर मिलने जाने की बात कही।
- बसपा सहित सभी संविधान समर्थक दलों से साथ आने की अपील।
- कांग्रेस ने सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता बताया।
- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति तेज होने के संकेत।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की वकालत करते हुए कहा है कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले सभी दलों को एक मंच पर आना चाहिए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी को भी इस एकजुटता का हिस्सा बनने का आह्वान किया है।
राजेंद्र पाल गौतम ने स्पष्ट कहा कि यदि बसपा सुप्रीमो मायावती उन्हें चर्चा के लिए बुलाती हैं तो वह उनसे मिलने जरूर जाएंगे। उनका कहना है कि देश और संविधान की रक्षा के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर साझा संघर्ष की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि सभी संविधान-प्रेमी और लोकतांत्रिक ताकतों को एक साथ आना होगा। उनके अनुसार, विपक्ष की एकजुटता ही उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में बदलाव ला सकती है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया सहित कांग्रेस नेताओं के मायावती से मुलाकात के प्रयास को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई थीं। हालांकि उस समय कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य संविधान और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर संवाद करना था।
प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में न्याय, विकास, समान अवसर और संविधान के मूल्यों पर आधारित राजनीति को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी हर वर्ग को सम्मान, अधिकार और समान भागीदारी दिलाने के लिए काम करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की यह रणनीति दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वहीं बसपा और कांग्रेस के संभावित समीकरणों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्षी एकता, सीट बंटवारे और संभावित गठबंधनों को लेकर आने वाले महीनों में और अधिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
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