“राज्यसभा चुनाव 2026 में NDA के 19 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पवन खेड़ा समेत 24 उम्मीदवारों ने बिना मुकाबले जीत दर्ज की। मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने से भाजपा को बड़ा फायदा मिला। जानिए पूरा नंबर गेम और राजनीतिक समीकरण।“
नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने उच्च सदन में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। 27 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में 24 सीटों के नतीजे लगभग तय हो चुके हैं। इनमें से 19 सीटों पर एनडीए समर्थित उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के पांच उम्मीदवार भी बिना मुकाबले उच्च सदन पहुंचने में सफल रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा, भाजपा के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया और तरुण चुग सहित कुल 24 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। अब केवल झारखंड की दो और मिजोरम की एक सीट पर 18 जून को मतदान होना है।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका मध्य प्रदेश में लगा। पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र आपराधिक प्रकरण का उल्लेख न करने के कारण निरस्त कर दिया गया। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसके बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवारों—तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट—का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया। नाम वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद रिटर्निंग अधिकारी ने तीनों नेताओं को निर्वाचित घोषित करते हुए प्रमाणपत्र सौंप दिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य प्रदेश में संख्या बल के आधार पर भाजपा दो और कांग्रेस एक सीट जीतने की स्थिति में थी, लेकिन नामांकन रद्द होने से मुकाबला ही समाप्त हो गया।
कर्नाटक से खरगे और पवन खेड़ा निर्विरोध
कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी सचिव मंसूर अली खान और पवन खेड़ा को निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुना गया। भाजपा के एम. नागराज भी निर्विरोध निर्वाचित हुए।
चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन एक निर्दलीय उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने के बाद सभी चार उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए। इसी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, जिससे संसद में उनकी पांच दशक से अधिक लंबी संसदीय यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त होगा।
गुजरात में कांग्रेस ने नहीं उतारा उम्मीदवार
गुजरात में भाजपा ने एक बार फिर अपना राजनीतिक वर्चस्व दिखाया। कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार नहीं उतारे जाने के कारण भाजपा के चारों उम्मीदवार—राजूभाई शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेशभाई राठवा और जितेंद्र कंजारिया—निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
आंध्र प्रदेश में NDA का क्लीन स्वीप
आंध्र प्रदेश में एनडीए गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के बश्याम रामकृष्ण, सी. विजय और सना सतीश बाबू के साथ जनसेना पार्टी के लिंगमनेनी रमेश को निर्विरोध चुना गया।
राज्य में हाल ही में सत्ता परिवर्तन के बाद यह जीत एनडीए की बढ़ती राजनीतिक ताकत का संकेत मानी जा रही है।
राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस दोनों को सफलता
राजस्थान की तीन सीटों पर भाजपा के सतीश पूनिया और अलका गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी निर्विरोध चुने गए। इन सीटों पर किसी तरह का राजनीतिक संघर्ष नहीं हुआ और सभी उम्मीदवार आसानी से उच्च सदन पहुंच गए।
पूर्वोत्तर राज्यों में भी भाजपा की बढ़त
मेघालय की एकमात्र राज्यसभा सीट पर नेशनल पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जेम्स के. संगमा निर्विरोध चुने गए। वह मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के भाई हैं।
मणिपुर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अधिकारिमयुम शारदा देवी और अरुणाचल प्रदेश से वरिष्ठ भाजपा नेता ताई तागाक को भी राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया।
उपचुनावों में भी NDA को बढ़त
महाराष्ट्र में रिक्त हुई सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के राजेंद्र जैन निर्विरोध चुने गए। यह सीट सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।
ओडिशा में भाजपा उम्मीदवार देबाशीष सामंतराय को राज्यसभा भेजा गया। वे हाल ही में बीजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं तमिलनाडु से कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण चक्रवर्ती निर्वाचित हुए, जिन्हें सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) का समर्थन प्राप्त था।
अब झारखंड और मिजोरम पर नजर
राज्यसभा चुनाव का सबसे रोचक मुकाबला अब झारखंड में देखने को मिलेगा। यहां दो सीटों के लिए झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी मैदान में हैं। नाथवानी को भाजपा का समर्थन प्राप्त है, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
मिजोरम की एकमात्र सीट पर सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) के के. लालतलुआंगकिमा और विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की जोथानसांगी हमार आमने-सामने हैं।
क्या कहता है नंबर गेम?
राज्यसभा चुनाव के इस चरण में एनडीए को 19 सीटों पर निर्विरोध सफलता मिलने से उच्च सदन में उसकी ताकत और बढ़ेगी। कांग्रेस को पांच सीटों का लाभ मिला है, लेकिन मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने से पार्टी को बड़ा राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक झटका लगा है।
अब सभी की नजर 18 जून को होने वाले झारखंड और मिजोरम के चुनावों पर टिकी है, जहां परिणाम राज्यसभा में दलों के अंतिम आंकड़ों को तय करेंगे।
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