35 साल पुराने आर्म्स एक्ट मामले में मंत्री राकेश सचान बरी, MP-MLA कोर्ट ने सजा का फैसला पलटा

उत्तर प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान को 35 साल पुराने आर्म्स एक्ट मामले में बड़ी राहत मिली है। कानपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने 2022 में सुनाई गई सजा रद्द करते हुए उन्हें दोषमुक्त करार दिया।

कानपुर। उत्तर प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान को 35 वर्ष पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। कानपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई एक वर्ष की सजा को निरस्त करते हुए उन्हें दोषमुक्त करार दिया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश विजय कुमार गुप्ता की अदालत ने अपील पर सुनवाई के बाद सुनाया।

1991 में दर्ज हुआ था मामला

मामला 13 अगस्त 1991 का है, जब नौबस्ता थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष बृजमोहन उदेनिया ने राकेश सचान के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि उनके पास से एक राइफल और नौ कारतूस बरामद हुए थे तथा वह मौके पर हथियार का वैध लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके थे।

इस मुकदमे में दिनेश चंद्र सचान और विनोद वर्मा भी आरोपी बनाए गए थे। दोनों के मामलों का फैसला पहले ही हो चुका था, जबकि राकेश सचान से जुड़ी फाइल जनप्रतिनिधि होने के कारण एमपी-एमएलए कोर्ट को स्थानांतरित कर दी गई थी।

2022 में मिली थी एक साल की सजा

आठ अगस्त 2022 को अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट (तृतीय) की अदालत ने राकेश सचान को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास और 1,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी।

अपील पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए मंत्री राकेश सचान को दोषमुक्त घोषित कर दिया।

चार साल पुराना विवाद भी रहा था चर्चा में

साल 2022 में यह मामला उस समय भी चर्चा में आया था, जब दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाए जाने से पहले राकेश सचान अदालत परिसर से चले गए थे। इस दौरान अदालत का आदेश गायब होने का विवाद भी सामने आया था और उन पर आदेश अपने साथ ले जाने का आरोप लगा था। इसके बाद एफआईआर दर्ज करने की स्थिति बनी थी।

बाद में राकेश सचान ने अदालत में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद आदेश का पुनर्गठन कर उन्हें सजा सुनाई गई थी।

अपील में मिली राहत

बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि निचली अदालत के निर्णय में कई कानूनी पहलुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। अपील पर विस्तृत सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने सजा को निरस्त करते हुए राकेश सचान को आर्म्स एक्ट के मुकदमे से पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया। इसके साथ ही करीब साढ़े तीन दशक पुराने इस मामले का कानूनी पटाक्षेप हो गया।

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