अयोध्या के Shri Ram Janmabhoomi Mandir में चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जांच की मांग के बीच ट्रस्ट ने एक कर्मी को हटाकर पूर्व सैनिक को तैनात किया है। संघ और विहिप में भी मतभेद देखने को मिल रहे हैं और समीक्षा बैठक टलने के आसार हैं।
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण को लेकर मंदिर आंदोलन से जुड़े राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ पदाधिकारियों में असंतोष और व्यथा देखने को मिल रही है। वहीं मंदिर ट्रस्ट के भीतर भी इस मुद्दे पर दो अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं।
एक ओर जहां कुछ लोग मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक या साजिश से जोड़कर देख रहा है। हालांकि सभी स्तरों पर यह स्वीकार किया जा रहा है कि इस घटना से रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है।
एक कर्मी हटाया गया, पूर्व सैनिक की तैनाती
सूत्रों के अनुसार, दानपात्र गणना से जुड़े एक कर्मी को पद से हटा दिया गया है और उसकी जगह एक भूतपूर्व सैनिक को तैनात किया गया है। यह बदलाव मंदिर की दान-गणना व्यवस्था में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह निर्णय ट्रस्ट के एक पदाधिकारी के निर्देश पर लिया गया है। हटाया गया कर्मी लंबे समय से गणना कार्य से जुड़ा हुआ था।
ट्रस्ट और संघ स्तर पर बढ़ी हलचल
मामले को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने फिलहाल सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंदरूनी स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। संघ और विहिप से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और रिपोर्टें मंगाई जा रही हैं।
कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ता इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए सुधार की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे बाहरी साजिश का परिणाम बता रहे हैं।
बैठकों पर भी पड़ सकता है असर
प्रकरण के बाद 13 जून से प्रस्तावित राम मंदिर निर्माण समिति की समीक्षा बैठक के टलने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र इस घटना से आहत बताए जा रहे हैं।
यदि बैठक होती भी है, तो उसमें निर्माण कार्यों के साथ-साथ चढ़ावा गबन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है।
इसके अलावा इसी माह के अंत में होने वाली ट्रस्टियों की त्रैमासिक बैठक में भी मंदिर प्रबंधन में बड़े बदलावों की चर्चा संभावित है।
राम मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर चढ़ावे से जुड़ी इस कथित अनियमितता ने प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच और ट्रस्ट के निर्णय इस मामले की दिशा तय करेंगे।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”









