राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद बड़ा फैसला! SBI के साथ एक और बैंक को मिल सकती है जिम्मेदारी

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बड़ा फैसला ले सकता है। चढ़ावे की गणना के लिए SBI के साथ दूसरे बैंक को शामिल करने और बैंकिंग व्यवस्था की समीक्षा पर विचार किया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर।

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपनी वित्तीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना (Donation Counting) के लिए अब भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ किसी दूसरे बैंक को भी शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की वित्त समिति द्वारा लिया जाएगा।

चढ़ावा चोरी के बाद बदलेगी व्यवस्था

हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी मामले के बाद ट्रस्ट ने सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। वर्तमान में मंदिर के दानपात्रों में आने वाली राशि की गणना और जमा करने की जिम्मेदारी SBI की अयोध्या शाखा के पास है। अब इस व्यवस्था में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

वित्त समिति करेगी समीक्षा

ट्रस्ट ने बैंक के साथ हुए एमओयू (Memorandum of Understanding) और उसके अनुपालन की समीक्षा का जिम्मा अपनी वित्त समिति को सौंपा है। समिति बैंक प्रबंधन के साथ बैठक कर मौजूदा व्यवस्था, जिम्मेदारियों और भविष्य की कार्यप्रणाली पर विचार करेगी।

SBI की भूमिका पर उठे सवाल

ट्रस्ट का कहना है कि बैंक के साथ हुए समझौते के तहत कुछ जिम्मेदारियों के पालन में त्रुटियां सामने आई हैं। अनियमितताओं के उजागर होने के बाद बैंक की प्रतिक्रिया और गंभीरता को लेकर ट्रस्ट ने असंतोष भी जताया है। इसी वजह से बैंक के साथ भविष्य के संबंधों पर पुनर्विचार किया जा रहा है।

चोरी मामले में बैंक और ट्रस्ट के कर्मचारी आरोपी

जांच में सामने आया है कि चढ़ावा चोरी मामले में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें छह बैंक कर्मचारी और दो ट्रस्ट कर्मचारी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, महाकुंभ के दौरान बैंक द्वारा नियुक्त की गई एजेंसी के कर्मचारी भी आरोपियों में शामिल हैं।

दूसरे बैंक को शामिल करने पर विचार

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट दो विकल्पों पर विचार कर रहा है—

  • SBI के साथ एक अन्य बैंक को जोड़कर संयुक्त गणना व्यवस्था लागू की जाए।
  • यदि आवश्यकता महसूस हुई तो SBI को पूरी प्रक्रिया से हटाकर नई बैंकिंग व्यवस्था बनाई जाए।

हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

ट्रस्टी ने क्या कहा?

ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े सभी निर्णय वित्त समिति द्वारा लिए जाएंगे। समिति की सिफारिश के बाद ही अंतिम फैसला किया जाएगा।

पारदर्शिता बढ़ाने पर रहेगा फोकस

सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट का उद्देश्य चढ़ावे की गणना और जमा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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