“भरतपुर के पैरा शूटर रुद्रांश खंडेलवाल ने आठ साल की उम्र में पटाखों के हादसे में अपना बायां पैर गंवा दिया था। मां के भरोसे और अपनी मेहनत से वह पैरालंपियन, वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर बने और अब अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुने गए हैं।“
भरतपुर। आठ साल की उम्र में जब रुद्रांश खंडेलवाल ने एक हादसे में अपना बायां पैर गंवाया, तब उनके सामने जिंदगी का एक ऐसा मोड़ था जहां सामान्य बचपन भी एक चुनौती बन गया था। साइकिल चलाना, जींस और जूते पहनना या दूसरे बच्चों की तरह खेलना—इन छोटी-छोटी इच्छाओं को लेकर रुद्रांश अपनी मां विनिता से सवाल करते थे।
हर बार मां का जवाब एक ही होता था—‘तुम करोगे।’
मां के इसी विश्वास को रुद्रांश ने अपनी ताकत बनाया। आज वही बच्चा अंतरराष्ट्रीय पैरा शूटर है, विश्व रैंकिंग में नंबर-1 रह चुका है, वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुका है, एशियन पैरा गेम्स में पदक जीत चुका है और 2024 पेरिस पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है। अब रुद्रांश को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है।
शादी समारोह में हुआ था दर्दनाक हादसा
रुद्रांश की जिंदगी बदलने वाला हादसा 24 जनवरी 2015 को हुआ था। परिवार एक शादी समारोह में शामिल होने गया था। कार्यक्रम देखने के लिए परिवार के लोग मंच की ओर बढ़ रहे थे, तभी वहां रखे पटाखों में अचानक विस्फोट हो गया।
धमाका इतना भयावह था कि कुछ समय के लिए परिवार को समझ ही नहीं आया कि बच्चों को कैसे सुरक्षित निकाला जाए। रुद्रांश गंभीर रूप से घायल हो गए।
परिवार उन्हें पहले एक निजी अस्पताल ले गया, लेकिन वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद उन्हें भरतपुर के आरबीएम अस्पताल ले जाया गया। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जयपुर रेफर किया गया। इसके बाद इलाज के लिए एसएमएस अस्पताल, फिर निजी अस्पताल और अंत में दिल्ली के मेदांता अस्पताल ले जाया गया।
संक्रमण रोकने के लिए काटना पड़ा पैर
26 जनवरी को रुद्रांश दिल्ली पहुंचे। तब तक काफी खून बह चुका था और संक्रमण तेजी से फैल रहा था। उनका ब्लड ग्रुप O-negative होने के कारण परिवार की चिंता और बढ़ गई थी।
डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि संक्रमण को रोकने के लिए बायां पैर काटना ही एकमात्र विकल्प है। महज आठ साल की उम्र में रुद्रांश का बायां पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा।
मां ने बेटे से कहा- ‘तुम फिर खेलोगे’
रुद्रांश संयुक्त परिवार में पले-बढ़े, जहां पांच बच्चे साथ खेलते और अपना अधिकांश समय एक-दूसरे के साथ बिताते थे। पैर कटने के बाद उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या वह अब अपने भाई-बहनों और दूसरे बच्चों की तरह खेल पाएंगे।
मां विनिता ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह फिर खेलेंगे।
प्रोस्थेटिक पैर लगने के बाद रुद्रांश ने धीरे-धीरे दोबारा चलना सीखा। उन्हें साइकिल चलाना बेहद पसंद था। वह फिर से जींस और जूते पहनना चाहते थे। जब उन्होंने मां से पूछा कि अब वह साइकिल कैसे चलाएंगे, तो मां ने फिर वही जवाब दिया—‘तुम करोगे।’
रुद्रांश ने आखिरकार प्रोस्थेटिक पैर के सहारे साइकिल चलाना सीख लिया और धीरे-धीरे उन गतिविधियों में लौटने लगे जिन्हें वह हादसे के बाद खो चुका समझते थे।
2016 में शूटिंग ने बदल दी जिंदगी
रुद्रांश की जिंदगी में बड़ा बदलाव वर्ष 2016 में आया, जब उन्होंने पैरा शूटिंग की दुनिया में कदम रखा। उनकी मां विनिता एक निजी कॉलेज में लेक्चरर हैं। कॉलेज के छात्र सत्यप्रकाश लूहाच और उनके बेटे कार्तिकेय द्वारा संचालित शूटिंग रेंज में जाते थे।
यहीं विनिता की मुलाकात कोच सुमित राठी से हुई। उन्होंने उनसे पूछा कि क्या रुद्रांश शूटिंग कर सकते हैं।
कोच ने उन्हें हौसला देते हुए कहा कि रुद्रांश क्यों नहीं कर सकते। उन्हें बच्चे को शूटिंग रेंज लाने के लिए कहा गया और भरोसा दिया गया कि बाकी जिम्मेदारी वे संभालेंगे।
कोच की भविष्यवाणी भी हुई सच
विनिता को सत्यप्रकाश लूहाच की वह बात भी याद है, जब उन्होंने रुद्रांश के भविष्य को लेकर बड़ा भरोसा जताया था। उन्होंने कहा था कि यह बच्चा एक दिन ओलंपिक तक पहुंचेगा और पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करेगा।
कई साल बाद रुद्रांश ने 2024 पेरिस पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर उस भरोसे को सच साबित किया।
सीढ़ियों से गिरने के बावजूद नहीं छोड़ा अभ्यास
रुद्रांश का सफर आसान नहीं था। शुरुआती प्रशिक्षण के दौरान वह कई बार सीढ़ियों से गिर गए। कई ऐसे मौके भी आए जब उन्हें खुद लगा कि शायद वह आगे शूटिंग जारी नहीं रख पाएंगे।
लेकिन परिवार का साथ और खुद को साबित करने की जिद ने उन्हें रुकने नहीं दिया। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जीता गया सिल्वर मेडल उनके लिए बड़ा आत्मविश्वास लेकर आया। इसके बाद एक के बाद एक उपलब्धियां मिलती गईं और उनका विश्वास मजबूत होता गया कि शूटिंग उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकती है।
करीब 70 राष्ट्रीय और 25 अंतरराष्ट्रीय पदक
रुद्रांश की मां के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में करीब 70 पदक जीते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके खाते में लगभग 25 पदक हैं।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में एशियन पैरा गेम्स के दो सिल्वर मेडल और वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट की प्रतियोगिताओं में जीते गए पदक शामिल हैं।
बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, बने वर्ल्ड नंबर-1
रुद्रांश ने वर्ष 2023 में क्रोएशिया के ओसिजेक में आयोजित वर्ल्ड कप में P4 मिक्स्ड 50 मीटर पिस्टल SH1 स्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
उनका प्रदर्शन उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी सफल रहा और वह विश्व रैंकिंग में नंबर-1 स्थान तक पहुंचे।
पेरिस पैरालंपिक में मामूली अंतर से चूके फाइनल
वर्ष 2024 में रुद्रांश ने पेरिस पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 स्पर्धा के क्वालिफिकेशन में वह नौवें स्थान पर रहे और मामूली अंतर से फाइनल में जगह बनाने से चूक गए।
उन्होंने मिक्स्ड 50 मीटर पिस्टल SH1 स्पर्धा में भी हिस्सा लिया।
मां के लिए हर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता होती थी परीक्षा
रुद्रांश की प्रतियोगिताओं के दौरान उनकी मां विनिता की चिंता भी कम नहीं होती थी। दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों में समय का अंतर होने के कारण उन्हें रात-रात भर जागना पड़ता था।
कई प्रतियोगिताओं का लाइव प्रसारण भी उपलब्ध नहीं होता था। ऐसे में कोच या टीम के सदस्यों के ग्रुप में आने वाले रिजल्ट का इंतजार करना ही उनका सहारा होता था। वह बार-बार फोन चेक करती रहती थीं।
फिर अचानक बेटे का मैसेज आता—‘मम्मी, हो गया मेरा… और ये मेडल है।’
मां के लिए यही संदेश किसी भी पुरस्कार से कम नहीं था।
अर्जुन अवॉर्ड से बढ़ा सम्मान, लेकिन मां का सपना अभी बाकी
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने 18 अगस्त को राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के तहत रुद्रांश खंडेलवाल के अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयन की घोषणा की। इस सम्मान को लेकर उनका परिवार बेहद उत्साहित है।
विनिता का कहना है कि अर्जुन अवॉर्ड हर खिलाड़ी का सपना होता है। वर्षों के प्रदर्शन और उपलब्धियों के आकलन के बाद खिलाड़ियों का चयन किया जाता है और उन्हें गर्व है कि उनके बेटे को इस सम्मान के लिए चुना गया है।
हालांकि, मां के लिए अर्जुन अवॉर्ड मंजिल नहीं है। उनका सबसे बड़ा सपना अभी बाकी है—रुद्रांश पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतें और पोडियम पर तिरंगा सबसे ऊपर लहराए।
अब 2026 वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी
रुद्रांश अब अगली बड़ी चुनौती के लिए तैयार हैं। सितंबर में दक्षिण कोरिया के चांगवोन में 2026 World Shooting Para Sport Championships आयोजित होनी है।
रुद्रांश 10 मीटर और 50 मीटर पिस्टल स्पर्धाओं के साथ P5 कैटेगरी में भी प्रतिस्पर्धा करते हैं। अर्जुन अवॉर्ड के सम्मान के बाद अब उनकी नजर अंतरराष्ट्रीय सर्किट में अपना दबदबा और मजबूत करने पर है।








