“सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के तीसरे दिन केंद्र सरकार ने 2018 के फैसले पर सवाल उठाए। धार्मिक परंपरा, महिलाओं के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 25-26 पर बड़ी बहस।“
नई दिल्ली। केरल के Sabarimala Temple में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर Supreme Court of India में गुरुवार को तीसरे दिन भी अहम सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में दलील देते हुए कहा कि 2018 का फैसला इस धारणा पर आधारित था कि पुरुष श्रेष्ठ हैं और महिलाओं को निचले स्तर पर रखा गया।
यह मामला नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सामने है, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और परंपराओं के अधिकार जैसे व्यापक संवैधानिक प्रश्नों पर विचार किया जा रहा है।
केंद्र सरकार की दलील:
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने कहा कि यह विवाद किसी एक लिंग के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं जहां पुरुषों के प्रवेश पर भी विशेष नियम या प्रतिबंध लागू होते हैं।
परंपरा और आस्था का तर्क:
सुनवाई के दौरान केरल के Kottankulangara Devi Temple का उदाहरण दिया गया, जहां पुरुष पारंपरिक रूप से महिलाओं के वेश में पूजा करते हैं। केंद्र का कहना है कि हर धार्मिक स्थल की अपनी विशिष्ट परंपराएं होती हैं, जिन्हें एक समान नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
संवैधानिक प्रावधानों पर बहस:
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल K M Nataraj ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 की व्याख्या करते हुए तीन-स्तरीय अधिकार व्यवस्था बताई—
- व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता
- राज्य का नियामक अधिकार
- धार्मिक संस्थाओं के अधिकार
उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों को अलग-अलग नहीं, बल्कि समग्र रूप से समझने की आवश्यकता है।
इस दौरान मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने टिप्पणी की कि अनुच्छेद 25 व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़ा है, जबकि अनुच्छेद 26 धार्मिक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करता है।
2018 के फैसले का संदर्भ:
गौरतलब है कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने 4:1 के बहुमत से 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को बड़ी संविधान पीठ को सौंप दिया गया, ताकि इससे जुड़े व्यापक संवैधानिक प्रश्नों पर अंतिम निर्णय लिया जा सके।
यह सुनवाई अब देश में आस्था और संविधान के बीच संतुलन तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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