यूपी में 15 साल बाद जनगणना की तैयारी तेज, पहले मकानों की गिनती फिर आबादी का आंकलन

भारत की जनगणना 2027 होगी पूरी तरह डिजिटल; 20 करोड़ से कितनी बढ़ी आबादी, नए आंकड़ों से चलेगा पता

उत्तर प्रदेश में 15 साल बाद जनगणना की तैयारी शुरू, पहले मकानों की गिनती फिर आबादी का आंकड़ा। जानिए पूरा प्रोसेस, डेट और नए नियम।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 15 साल बाद जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। पिछली बार 2011 में हुई जनगणना के बाद अब भारत की जनगणना 2027 के तहत राज्य में नई गिनती की तैयारी तेज कर दी गई है।

इस बार जनगणना दो चरणों में होगी—पहले मकानों की गिनती (हाउस लिस्टिंग) और उसके बाद आबादी की गणना। इससे राज्य की वास्तविक जनसंख्या, संसाधनों और विकास की स्थिति का सटीक आंकलन हो सकेगा।

पहले मकान, फिर आबादी—क्या है फॉर्मूला?
जनगणना के पहले चरण में 22 मई से 20 जून 2026 तक मकानों की गिनती और उनकी स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच वास्तविक जनसंख्या की गणना होगी।

इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि एक घर में कितने लोग रहते हैं, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति क्या है और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता कैसी है।

2011 में कितनी थी यूपी की आबादी?
2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या लगभग 19.98 करोड़ (19,98,12,341) थी।

  • पुरुष: 10.44 करोड़
  • महिला: 9.53 करोड़
  • लिंगानुपात: 912 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
  • साक्षरता दर: 67.68%

अब 2027 की जनगणना से यह स्पष्ट होगा कि 15 वर्षों में राज्य की आबादी 20 करोड़ से कितनी आगे बढ़ चुकी है।

डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की जाएगी। डेटा संग्रह, प्रविष्टि, सत्यापन और निगरानी सभी कार्य ऑनलाइन होंगे।

मुख्य सचिव एस. पी. गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 10 अप्रैल तक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का डिजिटल डाटाबेस तैयार कर लिया जाए।

करीब 5.5 लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी, जिन्हें 16 अप्रैल से 7 मई के बीच प्रशिक्षण दिया जाएगा।

स्व-गणना का भी मिलेगा विकल्प
इस बार आम नागरिकों के लिए स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

  • पोर्टल खुलेगा: 7 मई से 21 मई 2026
  • नागरिक स्वयं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे

शहरी और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों, झुग्गी बस्तियों और अधिक गतिशील आबादी वाले इलाकों में विशेष ध्यान देकर सटीक आंकड़े जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। जियो-टैगिंग और सीमांकन के जरिए त्रुटिरहित डेटा सुनिश्चित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में होने वाली यह जनगणना न केवल आबादी के आंकड़े सामने लाएगी, बल्कि विकास योजनाओं की दिशा भी तय करेगी। 15 साल बाद होने जा रही इस प्रक्रिया से राज्य की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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