दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाला: AAP नेता सत्येंद्र जैन समेत छह गिरफ्तार, ACB ने खोली कथित रिश्वतखोरी की परतें

दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के मामले में ACB ने पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में टेंडर शर्तों में हेरफेर और करीब 1.52 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन का आरोप सामने आया है।

नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के टेंडर में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के मामले में दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। ACB ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया। एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी शर्तों के साथ छेड़छाड़ कर प्रतिस्पर्धा को सीमित किया गया और इसके बदले कथित तौर पर रिश्वत तथा कमीशन का लेनदेन हुआ।

छह आरोपितों की गिरफ्तारी

ACB के मुताबिक गिरफ्तार किए गए लोगों में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO एवं IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव, एएन एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के प्रोपराइटर पंकज वर्मा शामिल हैं।

एजेंसी के अनुसार सभी छह आरोपितों को जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 18 अगस्त को गिरफ्तार किया गया।

2024 में दर्ज हुई थी FIR

ACB ने बताया कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज FIR संख्या 10/2024 की जांच के आधार पर की गई है। यह मामला दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर 11 मई 2024 को दर्ज किया गया था।

जांच एजेंसी अब टेंडर प्रक्रिया, उससे जुड़े अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच कथित संपर्क तथा वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

टेंडर की तकनीकी शर्तों में हेरफेर का आरोप

ACB की जांच में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली जल बोर्ड के एसटीपी के उन्नयन और उनकी क्षमता बढ़ाने से जुड़े टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें रखी गईं, जिनसे कथित तौर पर एक विशेष तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी को फायदा हो सकता था।

एजेंसी के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में प्रस्तावित पायलट अध्ययन नहीं कराया गया। इसके अलावा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और मीडिया को लेकर ऐसी प्रतिबंधात्मक शर्तें जोड़ी गईं, जिनसे प्रतिस्पर्धा सीमित होने का आरोप है। उपचारित पानी के लिए जरूरी मानकों को भी कथित तौर पर तकनीकी शर्तों से बाहर रखा गया।

निजी लोगों और अधिकारियों के बीच बातचीत के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य

जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया गया। ACB का दावा है कि इसमें निजी व्यक्तियों और कुछ सरकारी अधिकारियों के बीच टेंडर की शर्तों, शुद्धिपत्र और अन्य दस्तावेजों को लेकर बातचीत के साक्ष्य मिले हैं।

एजेंसी का आरोप है कि बातचीत के दौरान जिन बदलावों पर चर्चा हुई, उनमें से कुछ बाद में एसटीपी के टेंडर दस्तावेजों में शामिल किए गए। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि टेंडर की अंतिम शर्तें तय करने में किन लोगों की भूमिका थी और कथित बदलावों से किसे लाभ पहुंचा।

1.52 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन की जांच

ACB ने वित्तीय लेनदेन की जांच में रिश्वत और कमीशन की रकम के कथित हस्तांतरण का भी दावा किया है। एजेंसी के मुताबिक यूरोटेक से जुड़े संस्थानों से एएन एंटरप्राइजेज को रकम भेजी गई और इसके बाद कथित तौर पर यह धन सरकारी अधिकारियों तथा उनके रिश्तेदारों तक पहुंचा।

जांच एजेंसी के अनुसार तत्कालीन DJB CEO उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में करीब 1.52 करोड़ रुपये पहुंचने का आरोप है। ACB का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर अचल संपत्ति खरीदने में किया गया। एजेंसी अब इस धन के स्रोत और इसके अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रही है।

आगे भी जारी रहेगी जांच

ACB के मुताबिक छहों आरोपितों से पूछताछ की जा रही है और उपलब्ध दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों तथा वित्तीय लेनदेन की कड़ियों का विश्लेषण जारी है। जांच एजेंसी कथित भ्रष्टाचार से अर्जित रकम और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का भी पता लगा रही है।

फिलहाल मामले में सभी आरोप जांच एजेंसी के दावे और आरोप हैं। अदालत में इन आरोपों की न्यायिक जांच और सुनवाई के बाद ही उनकी कानूनी स्थिति तय होगी।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली जल बोर्ड के एसटीपी के उन्नयन और क्षमता बढ़ाने के लिए टेंडर जारी किए गए थे। ACB की जांच के अनुसार इसी प्रक्रिया में तकनीकी शर्तों में कथित बदलाव, एक विशेष तकनीक को लाभ पहुंचाने की कोशिश और रिश्वत के कथित लेनदेन के आरोप सामने आए। 2024 में दर्ज FIR के बाद जांच आगे बढ़ी और अब पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

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