प्रयागराज विवाद के बाद उत्तराखंड से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिला सम्मान

Invitation to Avimukteshwaranand: “प्रयागराज स्नान विवाद के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बदरीनाथ धाम से गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण मिला। 23 अप्रैल को खुलेंगे कपाट।”

चमोली। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व होने वाली गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया है। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के गंगा स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद यह पहला मौका है जब शंकराचार्य उत्तराखंड की किसी धार्मिक यात्रा में आमंत्रित किए गए हैं।

 चमोली से आया बड़ा धार्मिक संकेत

प्रयागराज से बिना गंगा स्नान किए काशी पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने हाल ही में योगी सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। इसी बीच बदरीनाथ धाम से जुड़ा यह घटनाक्रम धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 डिमरी पंचायत ने भेजा औपचारिक न्योता

श्री बदरीनाथ धाम के पुजारी समुदाय की शीर्ष संस्था श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत ने शंकराचार्य को यह निमंत्रण भेजा है। पंचायत अध्यक्ष पंडित आशुतोष डिमरी ने बताया— “हमारी ओर से भेजे गए न्योते में भगवान बदरी विशाल के तेल कलश यानी गाडू घड़ा के ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम प्रस्थान में शामिल होने का आग्रह किया गया है। यह निमंत्रण पूरे पुजारी समुदाय की ओर से है।”

 शंकराचार्य पद को लेकर विवाद के बीच अहम संदेश

धार्मिक जानकारों का मानना है कि गाडू घड़ा यात्रा बदरीनाथ धाम की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है। ऐसे में शंकराचार्य के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को न्योता दिया जाना, उनके पद को लेकर चल रहे विवादों के बीच एक मजबूत धार्मिक मान्यता का संकेत है।

गौरतलब है कि उत्तर दिशा की शंकराचार्य पीठ ज्योतिषपीठ, बदरीनाथ धाम है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज शंकराचार्य के रूप में विराजमान हैं।

 क्या है गाडू घड़ा तेल परंपरा?

बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले गढ़वाल नरेश के नरेंद्र नगर राज दरबार में पारंपरिक रीति से तिलों का तेल निकाला जाता है।

  • इस प्रक्रिया में सुहागिन महिलाएं भाग लेती हैं
  • तेल निकालने में मशीनों का प्रयोग नहीं होता
  • सिलबट्टे, कोल्हू और हाथों से तेल पिरोया जाता है
  • यही तेल भगवान बदरी विशाल के लेप और अखंड ज्योति में प्रयोग होता है

तेल तैयार होने के बाद धार्मिक यात्रा के रूप में गाडू घड़ा यात्रा ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करती है।

23 अप्रैल को खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट

इस वर्ष 23 अप्रैल 2026 को प्रातः 6:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
इससे पहले 7 अप्रैल 2026 से गाडू घड़ा यात्रा की शुरुआत होगी। कपाट खुलने की तिथि की घोषणा राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने ग्रह-नक्षत्रों की गणना के बाद की थी।

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