दोपहर में सपा का दामन थामा, शाम को BJP की सूची में चमका नाम; यूपी की राजनीति में मचा घमासान

“UP Politics: पूर्व विधायक सिनोद शाक्य ने सपा का दामन थामा, लेकिन भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में उनका नाम भी शामिल रहा। यूपी की राजनीति में इस घटनाक्रम से हलचल तेज हो गई।“

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों की सूची सामने आने के बाद एक दिलचस्प मामला चर्चा का विषय बन गया है। बदायूं जिले की दातागंज विधानसभा सीट से पूर्व विधायक सिनोद शाक्य ने सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया। हालांकि, इसी दिन शाम को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से जारी प्रदेश कार्यसमिति की सूची में भी उनका नाम शामिल दिखाई दिया।

भाजपा की सूची में सिनोद शाक्य का नाम 88वें नंबर पर दर्ज था। खास बात यह रही कि उनके सपा में शामिल होने के कुछ ही घंटों बाद यह सूची सामने आई। इसके बाद राजनीतिक गलियारों और इंटरनेट मीडिया पर इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी सूची में दर्ज उनके नाम को सोशल मीडिया पर साझा किया।

सपा में शामिल होने के बाद भी भाजपा की सूची में कैसे आया सिनोद शाक्य का नाम?

दरअसल, बदायूं की दातागंज विधानसभा सीट से पूर्व विधायक सिनोद शाक्य ने सोमवार को समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। उनके सपा में शामिल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी।

इसी बीच शाम को भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों की सूची जारी हुई। सूची में 88वें स्थान पर सिनोद शाक्य का नाम दर्ज देखकर राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिल गई।

एक ही दिन में पार्टी बदलने और दूसरी ओर भाजपा की सूची में नाम बने रहने के इस घटनाक्रम ने सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह सूची में नाम अपडेट नहीं होने या प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक का मामला हो सकता है। इस संबंध में भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया था।

भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में सिर्फ एक नहीं, कई गड़बड़ियां

भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों की सूची में सिनोद शाक्य के नाम के अलावा भी कुछ विसंगतियां सामने आई हैं। सूची में आजमगढ़ के अखिलेश कुमार मिश्र उर्फ गुड्डू का नाम 510वें नंबर पर दर्ज है। वहीं, 513वें नंबर पर अखिलेश मिश्र नाम से एक और प्रविष्टि दिखाई गई है।

कार्यकर्ताओं के मुताबिक, ये दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं। ऐसे में एक ही सदस्य का नाम दो बार दर्ज होने की आशंका जताई गई है।

इसी तरह सूची में 502वें नंबर पर कृष्णपाल और 515वें नंबर पर श्रीकृष्ण पाल का नाम दर्ज है। पार्टी कार्यकर्ताओं का दावा है कि ये दोनों नाम भी एक ही व्यक्ति से संबंधित हैं।

सूची जारी होने के बाद भाजपा के भीतर भी चर्चा

प्रदेश कार्यसमिति की सूची में सामने आई इन विसंगतियों के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है। इतनी बड़ी सूची में एक ही व्यक्ति के नाम की दोहरी प्रविष्टि और पार्टी छोड़ चुके नेता का नाम शामिल रहना सूची तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि भाजपा सूची में सुधार करेगी या नहीं। पार्टी की तरफ से इन त्रुटियों को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यूपी में आगामी चुनाव से पहले सपा और भाजपा के बीच सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ही संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक समीकरण साधने में जुटी हैं। ऐसे में पूर्व विधायकों और प्रभावशाली नेताओं का पार्टी बदलना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सिनोद शाक्य का सपा में शामिल होना भी इसी राजनीतिक घटनाक्रम की एक अहम कड़ी है। दूसरी ओर, भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में उनका नाम बने रहने से यह मामला और चर्चा में आ गया है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सपा में शामिल हो चुके सिनोद शाक्य का नाम भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में किस आधार पर दर्ज रहा। पार्टी की आधिकारिक सफाई और संशोधित सूची आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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