“Sugar Price Hike के बीच सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है और अक्टूबर का उत्पादन घरेलू बाजार में आने से अगले सप्ताह कीमतों में नरमी आ सकती है।“
नई दिल्ली। त्योहारों के सीजन से पहले देश में चीनी की कीमतों में तेजी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 22 अगस्त को बढ़कर 60.26 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि 17 अगस्त को यह 51.68 रुपये प्रति किलोग्राम थी। 22 जुलाई को चीनी की औसत कीमत 48.52 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
कीमतों में अचानक आई तेजी के बीच केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है। सरकार के इस कदम से बाजार में आपूर्ति बढ़ने और त्योहारों के दौरान कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात से मिलेगी राहत
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति शून्य शुल्क पर दी है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे बाजार को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी और त्योहारी मांग के दौरान आपूर्ति को लेकर चिंता कम होगी।
हालांकि बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा आयात मात्रा पूरे साल के लिए पर्याप्त होगी या बाद में और चीनी का आयात करना पड़ेगा। उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और तत्काल किसी कमी की स्थिति नहीं है।
ISMA ने कहा- देश में चीनी की कमी नहीं
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि चीनी के दाम में हालिया बढ़ोतरी बाजार की वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक कीमतों में तेजी के पीछे अटकलें और त्योहारों से पहले घबराहट में खरीदारी प्रमुख कारण हो सकती है।
उन्होंने कहा कि मिलों के पास घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक है। नए सीजन की पेराई भी सामान्य से 10 से 15 दिन पहले शुरू होने की उम्मीद है। इससे बाजार में नई चीनी की आपूर्ति भी पहले शुरू हो सकती है।
बल्लानी के अनुसार कच्ची चीनी के आयात की अनुमति किसी तत्काल कमी के कारण नहीं, बल्कि त्योहारी सीजन में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए उठाया गया एहतियाती कदम है। उन्होंने भरोसा जताया कि आयात और नई पेराई शुरू होने के बाद चीनी की कीमतों में जल्द नरमी आएगी।
अक्टूबर का उत्पादन घरेलू बाजार में बेचने की छूट से बढ़ेगी आपूर्ति
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीनी मिलों को अक्टूबर में उत्पादित चीनी घरेलू बाजार में स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति दी जाती है तो बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है। इससे आने वाले सप्ताह में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
मिलों की नई पेराई जल्दी शुरू होने से भी बाजार में ताजा स्टॉक आने लगेगा। इससे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
उपभोक्ताओं से सामान्य जरूरत के मुताबिक खरीदारी की अपील
ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के चेयरमैन प्रफुल्ल विठलानी ने उपभोक्ताओं से जरूरत से ज्यादा चीनी नहीं खरीदने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में घबराकर खरीदारी करने की जरूरत नहीं है।
उनके अनुसार 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति और अक्टूबर में मिलों को घरेलू बाजार में उत्पादन बेचने की छूट जैसे कदम पर्याप्त हैं। फिलहाल अतिरिक्त आयात की जरूरत नहीं दिखाई देती।
एक साल में कितनी बदली चीनी की कीमत
उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के आंकड़ों के मुताबिक 22 अगस्त 2026 को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 60.26 रुपये प्रति किलोग्राम रही। यह 17 अगस्त के 51.68 रुपये के मुकाबले काफी अधिक है।
22 जुलाई को औसत कीमत 48.52 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि पिछले साल इसी दिन चीनी 46.25 रुपये प्रति किलोग्राम के औसत भाव पर बिक रही थी। इस तरह पिछले कुछ हफ्तों में कीमतों में तेजी देखी गई है।
चीनी निर्यात में भी आया बड़ा बदलाव
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के आंकड़ों के अनुसार भारत से चीनी का निर्यात 2016-17 में 0.47 लाख टन से बढ़कर 2021-22 में रिकॉर्ड 110 लाख टन तक पहुंच गया था। इसके बाद निर्यात में तेज गिरावट आई।
2023-24 में चीनी निर्यात घटकर एक लाख टन रह गया, जबकि 2024-25 में इसमें सुधार हुआ और निर्यात नौ लाख टन तक पहुंच गया।









