“पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ भगवान राम और हनुमान पर कथित अमर्यादित टिप्पणी के मामले में पीलीभीत की एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए 31 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई की तारीख तय की है।“
पीलीभीत। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ भगवान श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान को लेकर कथित अमर्यादित टिप्पणी करने के आरोप में पीलीभीत की एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामले का संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।
सार्वजनिक मंच से टिप्पणी का आरोप
परिवादकर्ता के अनुसार, 23 जून को आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने भगवान श्रीराम, राम मंदिर और भगवान हनुमान के संबंध में विवादित और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। आरोप है कि उनके बयान से धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और व्यापक स्तर पर लोगों में नाराजगी देखने को मिली।
बताया गया कि संबंधित बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न समाचार चैनलों के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित हुए, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
ट्रस्ट अध्यक्ष ने दाखिल किया परिवाद
यह परिवाद ज्वालामुखी चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता नीलेश चतुर्वेदी की ओर से दायर किया गया है।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने भगवान श्रीराम और भगवान हनुमान से जुड़े धार्मिक प्रसंगों पर सार्वजनिक मंच से टिप्पणी करते हुए उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुईं।
एमपी-एमएलए कोर्ट ने लिया संज्ञान
मामले की सुनवाई के बाद पीलीभीत स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी सतीश कुमार ने परिवाद का संज्ञान लेते हुए उसे दर्ज करने के निर्देश दिए।
अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 31 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित की है। अब आगामी सुनवाई में परिवादकर्ता की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार किया जाएगा।
पहले भी विवादों में रहे हैं स्वामी प्रसाद मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर दिए गए अपने बयानों को लेकर कई बार राजनीतिक और सामाजिक विवादों के केंद्र में रहे हैं। उनके विभिन्न बयानों पर प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन और कानूनी कार्रवाई की मांग उठती रही है।
हालांकि, इस मामले में अदालत की प्रक्रिया जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
31 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
अब सभी की निगाहें 31 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करेगी। मामले के राजनीतिक और सामाजिक महत्व को देखते हुए इसकी सुनवाई पर व्यापक नजर बनी हुई है।
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